पिछले बुधवार को देश के उत्तराखंड राज्य की विधानसभा ने गौ को राष्ट्र-माता का दर्जा प्रदान करने संबंधित प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इससे उत्तराखंड गाय को राष्ट्र-माता का दर्जा देने वाला प्रथम राज्य बन गया है। अब प्रस्ताव मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास गया है।
सदन में प्रस्ताव पेश करने वाली पशुपालन राज्य-मंत्री रेखा आर्य की सोच से ही स्पष्ट हो जाता है कि वे गायों को एक सजीव प्राणी भी समझती है या नहीं। उन्होंने गाय को राष्ट्र-माता का दर्जा दिए जाने के पीछे उसकी मानव के लिए अधिक उपयोगिता को आधार बताया। उन्होंने तो मनुष्य के लिए उसके दूध की महिमा का बखान तक कर डाला! एक पशु-पालन विभाग की मंत्री से और क्या अपेक्षा की जा सकती है?
हालाँकि सदन में यह संकल्प सर्व-सम्मति से पारित हुआ, फिर भी नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने सरकार पर गौ-सरंक्षण के कड़े कानून के बावजूद गायों पर हो रहे अत्याचार और क़त्ल का मामला उठाया। उन्होंने आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या की ओर भी ध्यान आकृषित किया। सिर्फ सदन में संकल्प पारित करने और राष्ट्र-माता का दर्जा देने से कोई गाय की रक्षा नहीं हो सकती!
गाय की रक्षा कैसे हो, ये बड़ा भीष्म-सवाल है। आम-जन भी इस मूल समस्या को समझना नहीं चाहते हैं और गाय के साथ झूठी सहानुभूति दिखाने का ढोंग करते रहते हैं, तो फिर राजनेताओं से क्या उम्मीद की जा सकती है?
जब तक पशुओं को "धन" या "संपत्ति" या "संसाधन" के रूप में देखा जाता रहेगा, वह हमेशा मानव द्वारा प्रताड़ित किया जाता रहेगा। मानव को अपने स्वार्थ हेतु पशुओं को दास बनाने की वृत्ति ही सारी समस्या की जड़ है।
जब नेता-प्रतिप्रक्ष ने इन मासूम बछड़ों के भूखे मरने का बुनियादी सवाल उठाया तो पशु-पालन सचिव ने सरकार के बचाव में बड़ी ही हास्यास्पद बात करी। उन्होंने कहा कि पिछले माह से सरकार ने गायों को चयनित वीर्य से गर्भवती करना शुरू कर दिया है जिससे लिंग पर नियंत्रण हो जायेगा और बछड़े पैदा ही नहीं होंगे, सभी बछिया ही पैदा होगी। इससे आवारा पशुओं और क़त्ल में काफी कमी आ जाएगी।
गौर करें, कि वो आवारा पशुओं और क़त्ल में सिर्फ कमी लाने तक ही बात कर सकते हैं। गौ-वध पर सम्पूर्ण रोक असंभव है। जब तक हम उसके दूध के कायल रहेंगे, वो हमारे अत्याचार और शोषण की पात्र बनी रहेगी। चाहे फिर आप उसको माता समझ कर दुराचार करवाएं या फिर बुढापे में "संसाधन" की आयु समाप्त होने की अवधारणा माने, गौ हमेशा दयनीय अवस्था में ही रहेगी।
सन्दर्भ:
https://inextlive.jagran.com/dehradun-uttarakhand-assembly-declare-cow-as-rashtra-mata-201809200033