इस प्यार को मैं क्या नाम दूँ।

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नमस्कार मित्रों!

(pixabay free image)

हमारे प्रिय मित्र भट्ट जी एक बहुत ही नेक, सज्जन और मानवतावादी व्यक्ति हैं। महिलाओं के प्रति इनके मन में अलग ही अनुराग रहता है। तभी तो एक पार्टी में एक हसीन महिला के पावों को देखकर उनके अंदर का मानवतावादी पुरुष तड़प गया।

तुरंत वे हसीना से बोले, "मैडम, आपके पैर बहुत हसीन हैं। कृपया इनको जमीन पर मत रखिए।"

हसीना भी तेज तर्रार थी। तुरंत बोली कि अपने पाँव जमीन में न रखूं तो चलूँगी कैसे? क्या अपने पैर उठाकर हाथों के बल चलूँ?

भट्ट जी भी कहाँ मानने वाले थे। तुरंत बोले कि आपको पैर जमीन पर रखने की जरूरत नहीं है। आप चाहें तो मैं आपको जिदगी भर अपनी पीठ पर उठाकर चल सकता हूँ।

महिला बहुत इम्प्रेस हुई। पार्टी के बाद जैसे ही भट्ट जी निकालने को हुए, वह तपाक से उनकी पीठ पर चढ़ गई। बोली कि मेरा घर यहाँ से दो किलोमीटर है, मुझे अपनी पीठ पर ले चलो।

अब भट्ट जी की मुसीबत शुरू हुई। किसी तरह सौ मीटर दूर तक तो उसको उठा के चल दिए पर फिर सांस फूल गई, घुटने जबाव देने लगे। तभी उनको सड़क किनारे एक बाइक खड़ी दिखी। उन्होंने महिला से कहा कि आप एक मिनट के लिए बाइक पर बैठ जाएँ, मैं अपना सूट ठीक कर दूँ। महिला बैठ गई। जैसे ही वो बाइक पर बैठी, भट्ट जी वहाँ से भाग निकले। महिला उनके पीछे दौड़ी पर भट्ट जी पकड़ में न आए।

आज भी वो हसीना भट्ट जी को खोज रही है पर भट्ट जी पकड़ में नहीं आ रहे हैं। वे उससे बचने के लिए शहर छोड़कर चले गए हैं।

नोट: इस कहानी का bhattg@bhattg से कोई तालुक नहीं हैं। कृपया कहानी के भट्ट जी को ये वाले भट्ट जी समझने की भूल न कारें।