मुंबई बम धमाकों के झूठे आरोप में जिंदगी के 9 साल जेल में काटे । अब बेदाग हैं और 400 पेज की किताब के लेखक । अब्दुल वाहिद शेख ( 38 ) पर मुंबई में ( 7 जुलाई , 2006 ) हुए ट्रेन धमाकों के आरोप सितंबर , 2015 को झूठे निकले । पेशे से शिक्षक रहे अब्दुल ने जेल से ही वकालत और पत्रकारिता की डिग्री हासिल की । हालांकि वे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि 10 माह के दौरान उर्दू में लिखी 400 पेज की किताब ‘ बेगुनाह कैदी ’ को मानते हैं । एक इंटरव्यू में अब्दुल बताते हैं कि वह किताब के जरिए तीन चीजें कहना चाहते हैं । पहला , मुंबई ट्रेन धमाके में कई मामले फर्जी हैं , कई निदोर्षों को फंसाया गया । दूसरा , देश में पुलिस राज चल रहा है । तीसरा कि अगर कोई झूठे आतंकी मामले में गिरफ्तार होता है तो क्या कर सकता है । अत्याचार का विरोध कैसे करे , न्याय प्रणाली के भीतर मदद कैसे ले । कई लोगों ने अब्दुल से अपने साथ हुई प्रताड़ना के लिए पुलिस के खिलाफ केस करने की सलाह दी । फिलहाल उनकी ऐसी योजना नहीं है । वह कहते हैं , अभी मेरा ध्यान अन्य 12 लोगों की सजा के खिलाफ अपील करने पर है । अब्दुल उन्हें निर्दोष मानते हैं ।