रसोई से बोर्डरूम तक: भारत में महिला उद्यमिता की एक नई उड़ान

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​बचपन से हम सबने अपने घरों में देखा है—मां या दादी सुबह से रात तक बिना थके घर का हर काम संभालती हैं, पर जब बाहर कमाने या बड़े फैसले लेने की बात आती है, तो समाज उन्हें रोक देता है। सदियों से यही सिखाया गया है कि एक औरत की दुनिया सिर्फ घर की चार दीवारों तक ही सीमित है। लेकिन आज तस्वीर तेजी से बदल रही है। आज की भारतीय महिला ने पितृसत्ता की इस पुरानी दीवार को पूरी तरह तोड़ दिया है और वह रसोई से निकालकर सीधे बड़े-बड़े बोर्डरूम्स और अपने खुद के बिजनेस की मालकिन बन रही है।

पुरानी सोच को पीछे छोड़ती हमारी उड़ान:
समाज ने महिलाओं के रास्ते में हमेशा से कई अनकही रुकावटें और पाबंदियां खड़ी की हैं। उन्हें पैसों के लेन-देन और महत्वपूर्ण फैसलों से दूर रखा गया। लेकिन आज की नारी अपनी किस्मत खुद लिखने का माद्दा रखती है। आज शिक्षा, इंटरनेट और खुद पर अटूट विश्वास की ताकत ने महिलाओं को एक नई उड़ान दी है। जो महिला कभी सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित थी, आज वही महिला अपने घर से ही पापड़-अचार का बिजनेस, फैशन बुटीक, हस्तशिल्प या फिर बड़े-बड़े टेक स्टार्टअप्स सफलतापूर्वक चला रही है। यह इस बात का साफ सबूत है कि घर संभालने की कला, बजट मैनेज करना और एक साथ कई काम करना (multitasking) असल में किसी भी बड़े बिजनेस को चलाने की सबसे पहली और पक्की ट्रेनिंग है।

​आगे का रास्ता और हमारी जिम्मेदारी:
इस बदलाव को और ज्यादा मजबूत बनाने के लिए हमे मिलकर समाज की सोच में बदलाव लाना होगा।

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