बेचारे करे तो क्या करे!

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नमस्कार मित्रों!

(AI generated image)

हमारे मित्र भट्ट जी बहुत ही मेहनती और जागरूक व्यक्ति हैं। वे हमेशा देश और समाज की भलाई के लिए काम करते हैं।

सरकार ने जब कहा कि लोगों को सरकारी नौकरी का मोह छोड़कर अपना कुटीर उद्योग शुरू करना चाहिए ताकि खुद को भी आमदनी हो और दूसरे लोगों को भी रोजगार मिले। तो हमारे भट्ट जी ने इस पर विचार किया और अपना कुटीर उद्योग शुरू किया पर सरकार को ये समझ नहीं आया। सरकार ने वह बंद करवा दिया। भट्ट जी हैरान थे कि आखिर उनसे गलती कहाँ हुई। उन्होंने तो घर पर ही शराब बनाने का बिजनस शुरू किया था। उनकी आमदनी हो रही थी और कई लोगों को काम पर भी रखा था। इससे उनके गाँव वाले भी खुश थे। उनको शराब के लिए दूर शहर नहीं जाना पड़ता था। फिर भी सरकार ने ये उद्योग बंद करवा दिया। ये कैसा इंसाफ है?

फिर सरकार ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ लगाइए। भट्ट जी ने भी अपनी जमीन पर पेड़-पोधे लगाए पर एक दिन पुलिस आई और उन पेड़-पोधों को नष्ट कर दिया। कह रहे थे कि भांग, अफीम के पेड़-पोधे लगाना गैरकानूनी है। जबकि भट्ट जी तो केवल पर्यावरण बचाने के लिए काम कर रहे थे। ऐसे में कोई करे तो क्या करे। देश समाज के लिए कुछ करना चाहो तो सरकार ही नहीं करने देती।

अब सरकार कह रही है कि देशहिट में टैक्स भरो। लेकिन अब भट्ट जी ने डिसाइड किया है कि अब सरकार की बात नहीं माननी। उन्होंने सरकार को टैक्स देना बंद कर दिया है।

धन्य है हमारे भट्ट जी।

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