मेरे प्यारे भाइयो और प्यारी प्यारी बहनो, सब मस्त तो हो न। मैं तो अकेला हूँ घर पर बोर हो रहा हूँ यार। अभी आंटी के घर से खाना खा के खा के आया हूँ। सुबह बताया था न मेरे घर में कोई नहीं है सब नानी के घर गए हुए है बस मैं ही ना गया यार। खाना आंटी के घर में खाया और आंटी ने कबाब भी बनाया था। कबाब खाने में ज्यादा मजा आया यार, क्या कमाल का कबाब बनाती है मेरी आंटी सच में मस्त कबाब बनाया है आंटी ने। मेरे घर में भी कबाब बना है लेकिन ऐसा कबाब कभी न बना मेरे घर में तो बस सिक में दाल के उसको शेका गया है गरम आग में। जैसे होटल वगेरा में होता है न बिलकुल वैसे ही बना है मेरे घर में।
लेकिन आंटी ने तो मस्त कबाब बनाया था यार, एक दम खा के दिल खुश हो गया है। आंटी को कुकिंग अच्छे से आती है और मेरी बहन से भी ज्यादा जानती है ये पुरानी खिलाड़ी है। इनसे भी मेरी बहन टिप्स लेते रहती है और कुछ न कुछ बनाते रहती है।
वैसे खाना तो सिंपल था भात था दाल था और सब्जी थी और चिकन फ्राई किया हुआ था। और बाकी के चिकन का मेरी आंटी ने कबाब बना दिया। और मुझे ज्यादा मजा कबाब खाने पर ही आया यार। मन तो कर रहा था की और भी खाओ लेकिन क्या करे ख़तम हो गया था ना इसलिए जितना था उतना ही खाया और ये सब चीजे पेट भर के खाने वाली नहीं होती है ना।