बचपन की कहानियां

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मेरे दादा भोले भाले दादी बड़ी सयानी।
दोनों मिलकर मुझे सुनाते हर दिन नई कहानी।
खेल-खेल में मैं रूठूं और कभी कहीं छुप जाऊँ
परेशान हो जाएं दोनों तब मैं बाहर आऊंँ 61s14e7-2vL._SX355_.jpg

बचपन की कहानियां | Ecency