पड़ोसी पर जुल्म करना हराम है

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अस्सलामू अलैकुम दोस्तों, मैं हूं नुसरत और आज मैं आपको एक बहुत प्यारी हदीस के बारे में बताने जा रही हूं। मुझे उम्मीद है की आपको ये हदीस पढ़कर अच्छा लगेगा और आप अपने ईमान को और मजबूत करेंगे।

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अन‌अबि हुरैराता रजि अल्लाहु अनहु , अन्ना रसुल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम काला : (ला यद खुलुल जन्नाता मन ला या मनु जा रुहु बवाइकाहु)
रवाहु मुस्लिम

तरजुमा : अबु हुरैरा रजि अल्लाहु अनहु से रवायत हे कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया : वह शख्स जन्नत मे दाखिल नहीं हो सकता जिस के वजह से उसका पड़ोसी महफुज ना हो ,
(मस्लिम: 47)

उसके फवाईद
(अलिफ) पड़ोसी पर जुल्म करना हराम है।
(बा) इस हदीस से पड़ोसियों के साथ हुसन सुलुक करने की फजिलत मआलुम होती है।
(जिम) जुल्म और दसत दरिजि, इसलाम मे बेहद ना पसंदीदा है।
(दाल) हम लोगों को अपने पड़ोसियों के साथ ज्यादा से ज्यादा हुसन सुलुक करना चाहिये।
हम लोगों को हमेशा ये जहन मे रखना चाहिए की कही मेरी वजह से मेरा पड़ोसी को कोई तकलीफ तो नहीं पहुंच रहा है।

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