हिंदी लव स्टोरी
HEARTH TOUCHING LOVE STORY
अंकित को पंद्रह साल की उम्र में ही प्यार हो गया था।अंकित उस समय आठवीं क्लास में था, उम्र कम थी लेकिन मॉडर्न ज़माने में लोग इसी उम्र में प्यार कर बैठते है।
अंकित का ये पहले प्यार उसकी क्लास में पढ़ने वाली लड़की 'नेहा 'के साथ था। नेहा अमीर घराने की लड़की थी ,उम्र यही कोई 15-16 साल ही होगी और दिखने में बला की खूबसूरत थी। नेहा के पापा का पॉपर्टी डीलिंग का काम था ,अच्छे पैसे वाले लोग थे।
अंकित मन ही मन नेहा को दिल दे बैठा था लेकिन हमेशा कहने से डरता था। अंकित के पिता स्कूल में टीचर थे। उनका परिवार भी सामान्य था इसीलिए डर से अंकित कभी प्यार का इज़हार नहीं करता था।
चलो इस प्यार के बहाने अंकित की एक गन्दी आदत सुधर गयी अंकित रोज़ स्कूल न जाने के बहाने बनता था पर अब टाइम से तैयार होकर चुपचाप स्कूल चला जाता था। माँ बाप सोचते बच्चा सुधर गया है लेकिन बच्चे का दिल तो कहीं और अटक चूका था।
समय ऐसे ही बीतता गया........ लेकिन अंकित कभी प्यार का इज़हार करने की हिम्मत नहीं हुई बस चोरी छिपे नीलम को देखा करता था। पर कभी कभी उनकी बात होती थी लेकिन पढाई के टॉपिक पर ही.... अंकित दिल की बात न कह पाया।
समय गुज़रा आठवीं पास की ,नौवी पास की ,...... अब दसवीं पास कर चुके थे लेकिन चाहत अभी भी दिल में हे छुपी थी।
आज स्कूल का अंतिम दिन था। अंकित मन ही मन उदास था की शायद
अब नेहा को कभी देख पायेगा ,क्युकी अंकित के पिता की ख़्वाहिश थी के दसवीं के बाद बेटे को बड़े शहर में पढ़ने भेजे।
स्कूल के अंतिम दिन सभी दोस्त एक दूसरे के प्यार से गले लग रहे थे ,अपनी यादे शेयर कर रहे थे
,नेहा अपने दोस्तों के साथ काफी खुश थी आज सब बहुत खुश थे अंतिम दिन जो था लेकिन अंकित की आँखों में आंसू थे।
अंकित चुपचाप क्लास में गया और नेहा के बैग से उसका identity card निकाल लिया। उस कार्ड पर नेहा की प्यारी सी फोटो थी। अंकित ने सोचा की इस फोटो को देख कर ही में अपने प्यार को याद कर लिया करूँगा।
बैंक से लोन लेकर पिताजी ने अंकित को बाहर पढ़ने भेज दिया। नेहा के पिता जी ने भी दूसरे शहर में घर बना लिया और वहां शिफ्ट हो गए।
अंकित अब हमेशा के लिए नेहा से जुदा हो गया था।
समय अपनी रफ़्तार से बीतता गया ,,,, अंकित ने अपनी पढाई पूरी की और अब एक बड़ी कंपनी में नौकरी भी करने लगा था ,अच्छी तनख्वाह थी
पर ज़िन्दगी में एक कमी हमेशा खलती थी -वो थी नेहा। लाख कोशिशो के बाद भी अंकित कभी नेहा से नहीं मिल पाया।
घर वालो ने अंकित की शादी एक सुन्दर लड़की से कर दी संयोग से उस लड़की का नाम भी नेहा हे था। अंकित जब भी पत्नी को नेहा नाम पुकारता उसके दिल की धड़कन
तेज़ हो उठती थी। आँखों के आगे बचपन की तस्वीरें उभर आया करती थी। पत्नी को उसने इस बात का कभी एहसास न होने दिया था लेकिन आज भी अंकित नेहा से सच्चा करता था।
एक दिन अंकित कुछ फाइल्स तलाश कर रहा था की अचानक से उसे वो नेहा का वो बचपन का identity card मिल गया। उस पर छपे नेहा
के प्यारे से चेहरे को देखकर अंकित भावुक हो उठा की तभी पत्नी अंदर आ गयी और उसने भी वह फोटो देख ली।
पत्नी - यह कोन है ? ज़रा इसकी फोटो मुझे भी दिखाओ।
अंकित -अरे कुछ नहीं ,ये ऐसे ही बचपन में दोस्त थी
पत्नी -अरे यह तो मेरी फोटो है ,ये मेरे बचपन का फोटो है.... देखो ये लिखा 'सरस्वती विध्या मंदिर ,स्कूल 'यही तो पढ़ती थी मै।
अंकित यह सुनकर ख़ुशी से पागल हो उठा -क्या यह तुम्हारी फोटो है ?में इस लड़की से बचपन से बहुत प्यार करता हूँ।
नेहा ने अंकित को अब अपनी पर्स्नल डायरी दिखाई जहाँ नेहा की बचपन की कई फोटो लगी हुई थी। अंकित की पत्नी वास्तव में वही नेहा थी जिसे वो बचपन से प्यार करता था।
नेहा ने अंकित के आंसू पोछे और प्यार से गले लगा लिया क्युकी वह आज से नहीं बचपन से हे उसे चाहता था।
अंकित बार बार भगवन का शुक्रिया अदा कर रहा था !!
दोस्तों वो कहते है ना अगर प्यार सच्चा हो तो रंग लाता ही है ,ठीक वही हुआ 'अंकित और नेहा के साथ भी।
आपको ये प्रेम कहानी कैसी लगी please comment करे।