आत्म ज्ञान बिना सब झूठ है ।

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यंत्र मंत्र सब झूठ हैं, मत भरमो सब कोई ।
सार शब्द जाने बिना, कागा हंस न होई ।।
यंत्र मन्त्र आदि जोकि मानव मन निर्मित हैं वो तो है ही झूठ, इनको रटने से कुछ नहीं होने वाला । मंत्र से बड़ा तोह मन्त्र बनाने वाला है जो जीव है । इसलिए यंत्र मन्त्र में न भटको यह सब मिथ्या है ।
और सार शब्द जो है वो हमारा चेतन आत्म स्वरूप है इसी को सार शब्द कहा जाता है । कागा हंस न होय से अभिप्राय है कि हंस नीर शीर अलग अलग कर देता है दूध में से पानी अलग कर दोनों को अलग अलग कर देता है यह शक्ति हंस में होती है काग में यह शक्ति नहीं होती ।
आत्म स्वरूप जाने बिना हम सब कागा ही हैं कौए ही हैं , जब हम आत्म स्वरूप को जान लेते हैं तब हम हंस बन जाते हैं तब हम जड़ देह और चेतन आत्मा जीव को अलग अलग अनुभव कर पाते हैं ।

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