My Second poetry..!

Words
120
Reading
1 min
8y
Listen to this post
~1 min

Hello friends I am sandeep kumar
and this is my second poem ,
IMG_20180913_162311.jpg
सूरज से यह सीख है मिलती,
सबके जीवन में प्रकाश भरो ।

चन्दा से सीख मिले यह हमको,
सबके मन को शीतल करो ।

धरती से सीख हमें यह मिलती,
धैर्यवान जीवन को बनाओ ।

तारों से सीख मिले यह बन्दे ,
टिम-टिम करते जग में छा जाओ ।

नन्ही चींटी सीख यह देती ,
दृढ़ संकल्प को न त्यागो तुम ।

जीवन में हो कष्ट अनेको ,
पर कर्तव्य से न भागो तुम ।

धैर्य से मन को ध्यान लगाकर ,
अपने लक्ष्य को साधो तुम ।

कहें सन्दीप हे मन मेरे ,
अब तो नींद से जागो तुम ।।

Thanks for all friends
"Sandeep kumar"