My fifth poetry.मैं धूप हूँ .

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Hello friends I sandeep kumar, this is our fifth poem It is in hindi,
मैं धूप हूँ मैं धूप हूँ धूप धूप मैं धूप हूँ ,

सबके कपडे़ मैं सुखाऊँ चेहरे पे सबके चमक मैं लाऊँ ।

हड्डी को मजबूत करूँ रोगों को मैं दूर करूँ ,

मैं धूप हूँ मैं धूप हूँ धूप करुं मैं धूप हूँ ,

धूप चिकित्सा को वैद्यों ने प्राकृतिक चिकित्सा है कहलाई ।

सरकार ने भी अब तो देखो धूप परियोजना है लाई ,

कहें सन्दीप धूप के गुण का कितना मैं बखान करुं ,

मैं धूप हूँ मैं धूप हूँ धूप करुं मैं धूप हूँ ।।
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Thanks friends.