नमस्कार दोस्तो,
आज हम बात करेंगे हमारे कम्फर्ट झोन के बारे में. क्यां हे ये कम्फर्ट झोन और ये हमारे जिवन को किस तरह प्रभावित करता है और कैसे हम ईसको समजकर जिवन में सफल हो शकते है.
ये जिवन को बदल देने वालां और जिवन में कुछ करने कि प्रेरणा देने वाला एवं उत्साह और जोश को बढावा देने वाला सबसे महत्वपूर्ण आर्टीकल रहेगा. तो आपसे निवेदन है कि आप अंत तक ईस आर्टीकल को जरूर पढें और आप को ये आर्टीकल कैसा लगा ये कमेन्ट करके जरुर बतायें. आर्टीकल पसंद आये तो अपवोट और कमेन्ट करें जिससे मुजे आगे और अच्छे आर्टीकल लिखने के लिये प्रेरणा मिलेगी. तो चलिये आगे बढते है.
दोस्तो ये साबित हो चूका है कि कोई भी ईन्सान ईसके दिमाग का सिर्फ पांच प्रतिशत ही ईस्तमाल करता है. उसको ये पता नहि कि उसकी काबेलियत कितनी है और वो अपने जिवन में क्या क्या कर शकता है. पृथ्वी कि संपूर्ण जिवसृष्टि से मुकाबले ईन्सान सबसे तैज है. वो अंतरिक्ष में जा शकता है, बडे से बडा प्लेन भी उडा शकता है और पानी में जहाज भी चला शकता है. उसके पास ईतनी क्रिएटीवीटी, स्कील और क्षमताएं है कि वो कोई भी बाधा पार कर शकता है.
लेकिन हमने हमारे आप पास एक सर्कल बना रखा है. जिसके दायरें में रहकर हम सारा काम करते है. और उसके ईर्गगिर्द ही कार्य करते है. हम ईतने लेजी हो गये है कि हम नया काम करने से और कोई भी जोखिम उठाने से डरते है. हमें तो ये भी मालुम नहि है कि हम कौन है, हम क्या कर शकते है, हममें कितनी खूबीयां और क्षमताए है. हम तो बस ऐक सलामत और आरामदेय जिंदगी ही पसंद करते है. हम ईस सर्कल से बहार निकलता नहीं चाहते या तो डरते है. चाहे हमारे पास कितने ही अवसर हो, स्किल हो हम उसका उपयोग नहि कर पाते.
दोस्तो आप अपनी शक्ति, कौशल, क्षमता को पहेचानो. अगर आप ठान लो - कुछ करने की तो आप जिवन में कोई भी काम आसानी से कर शकते हौ. कोई भी बाधा को पार कर शकते हो. मुश्किल के मुश्किल रास्तों को भी पार कर मंजिल तक पहूँचा जा शकता है. हरिवंशराय बच्चन कि कविता में लिखा है
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है, चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है, जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में, बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो, क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम, संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती
तो क्यूं हम छोटे छोटे कामो में उलझे रहते है. ईश्वर ने ये जो जिवन दिया है ये हमारा ईश्वर के साथ एक कोन्ट्राक्ट है. किसे पता है कि ये कोन्ट्राक्ट रीन्यु होगा भी या नही?
तो आईये सफलता कि उंची उडान भरने की ठान लेते है. जिवन में कुछ एसा करे कि पूरी दुनिया आपकी सफलता से पिछे भागें. कुछ ऐसा करे कि आपके पूरे परिवार को आप के उपर गर्व हो. दुनिया की सारी खुशीयां और सुख सुविधाएं आप के कदमों में हो.
अगर आप भी कुछ बडे से बडा मुकाम हांसिल करना चाहते है. तो सबसे पहलें आपने जो अपना कम्फर्ट झोन बनाया है उसको तोडना पडेगां. ये कम्फर्ट झोन को तोडना आसान नहीं है पर नामुमकिन भी नहीं. जब तक आप ईस कम्फर्ट झोन से बहार नहीं नीकलेंगे और सर्कल में ही रहेंगे तब तक कोई भी बडां लक्ष्य हांसिल करना मुश्किल है.
दोस्तो, ईतिहास में हम देखें तो कई एसी प्रतिभाएं है जिन्हों ने अपना कम्फर्ट झोन तोडा और महान बन गये. जैसे हमारे पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहेब ने एक समय न्यूजपेपर बैच के परिवार को चलाया था. उन्होने अपना कम्फर्ट झोन तोडा और एक महान वैज्ञानिक के रुप में पूरे विश्वमें उभर के सामने आये. और हमारे ग्यारवें राष्ट्रपति पद कि शोभा बढाई.
तो दोस्तो कब तक हम डर डर के जियेंगे. बहोत सारे डर से हम घिरे हुए है. लोग क्या कहेंगे, अगर सफलता नहिं मिली तो? ये तो जोखिम भरां काम है, में कर पाउंगा क्यां ?
कब तक हम ईस छोटी सोच से, ईस कम्फर्ट झोन, ईस सर्कल से घिरे रहेंगे. क्यूं हम हमारे ग्रेट आईडीया को एक चूनौति के रुपमें नहीं लेते और ईम्प्लीमेन्ट नहीं कर पाते. दोस्तो असफलता के डर से कोई भी कार्य को न करना समजदारी नहीं है.
दोस्तो हमारे साथ कई बार एसा हौता है कि मन में कई बार ग्रेट आईडीयास आये. लेकिन हम अपने कम्फर्ट झोन से बहार न निकल पायें. बाद में जब और कोई हमारे वहीं आईडिया के उपर काम करके सफल हौता है तब हमें अफसोस होता है कि शायद में हिंमत करके ये कर लेता तो आज मुकाम कोई और होता.
अंत में दोस्तो, समय की तिजोरी को युं ही खाली न करे. समय धन से भी मूल्यवान है. अगर जिवन में कोई बडां लक्ष्य हांसिल करना चाहतै हे, कुछ ऐसा करना चाहते हे की दुनिया आपका काम हंमेशा के लिये याद रखें, तो आज ही ये कम्फर्ट झोन को तोडें. एक उद्देश्य के साथ लक्ष्य बनाकर आगे बढते रहे. रुके नहीं. आज नहिं तो कल सफलता निच्छित रुप से मिलेगी ईसमें कोई दो राय नहि.!
क्या आपने भी कभी अपने जीवन में ऐसी परिस्थिति का सामना किया है?
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