भोलेनाथ :----अमरनाथ यात्रा जम्मू कश्मीर मे भोलेनाथ का दर्शन,,, सच्चे हिन्दू एकबार पड़लो,,,

milanm(47)
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भारत का ,,, जम्मू-कश्मीर में "" "श्री अमरनाथ" "का पवित्र गुफा बीराजमान हे,,, । जम्मू & कश्मीर का राजधानी, श्रीनगर से, उत्तर-पूर्व में समुद्रतल से लगभग 13,600 फीट ऊंचाई पर पवित्र गुफा, भगबन भोलेनाथ का गुफा अबोस्थित हे,, ।अमरनाथ यात्रा का पौराणिक एक अच्छा महत्व है,,, काशी में शिवलिंग के दर्शन और पूजा करनेसे अपको अगर 10 गुना पून्नो मिलता है,, तो बाबा बर्फ़नी ( भोलेबाबा) का दर्शन करने से हज़ार गुणा पून्नो मिलेगा अपको,, अमरनाथ यात्रा का हिन्दू धर्म के लिए बहुत महत्व है। अमरनाथ की पवित्र गुफा हिन्दुओं के लिए बहुत बड़ा तीर्थस्थल है।प्राचीनकाल में पवित्र गुफा के स्थान को अमरेश्वर महादेव या अमरेश्वर कहा जाता था। आजकल बाबा अमरनाथ को "" "बाबा बर्फानी" "" बोला जाता है।

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बर्फनी बाबा की???
बर्फनी बाबा की??
बर्फनी बाबा की??

अमरनाथ यात्रा का पवित्र गुफा में अमरत्व का गूढ़ रहस्य माना जाता है,
अमरनाथ गुफा भगवान शंकर का रहने का, और एक स्थान है। कैलाश पर्वत और अमरनाथ गुफा की यात्रा को मोक्ष प्राप्ति और पुण्य की भागीदारी के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। क्योंकि अमरनाथ गुफा में ही भोले भंडारी ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा में बर्फ का एक बीसाल आकार का, लगवाग (12/14 ft) प्राकृतिक शिवलिंग अपना App बनना, एक चमत्कार है। बर्फ से बने शिवलिंग के दर्शन कर भक्त अपने आपको बहुत धन्य मानते हैं, । बाबा अमरनाथ की गुफा 150 फीट ऊंची और करीब 90 फीट ऊंची है। पवित्र गुफा के परिसर के एक छोर में गुफा के ऊपर से बर्फ के पानी की बूंदें टपकती है, जो एक जगह पर हिम बूंदोंं के साथ इकट्ठा होकर लगभग 12 से 14 फीट ऊंचा शिवलिंग बनता है, जिसका आकार हर साल कभी घटता है, कभी बढ़ता है, श्री बाबा बर्फ़नी के शिवलिंग से थोड़ी ही दूरी पर मां पार्वती, गणेश और भैरव भी हिम शिवलिंग रूप में अबस्थान है,,
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पवित्र गुफा अमरनाथ का इतिहास
श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा को पहली बार एक गड़रिए ने 18वीं-19वीं शताब्दी में खोज निकाला था, जिसके नाम हे बूटा मालिक (बूटा मलिक) कहा जाता है। बूटा मलिक पवित्र गुफा के आसपास बकरियां चराने गया था। इतिहासकार के मुताबिक 1869 में ग्रीष्मकाल में गुफा की खोज की गई थी और पहली बार औपचारिक तौर पर अमरनाथ तीर्थ यात्रा 3 साल बाद 1872 में शुरू किया गया थी, जिसमें पूरी यात्रा के दौरान बूट मलिक भी सबके साथ थे। अमरनाथ यात्रा को पहले( मट्टन) मट्टन एक स्थान है, इहा अब सबसे ज्यादा सिख हे, लेकिन पहले मट्टन में कश्मीरी ब्राह्मण ज्वादा रहता था, ब्राम्हण के सहयोग से आयोजित किया जाता था और बाद में बट मलिकों ने यात्रा की जिम्मेदारी संभाल ली। दरअसल अमरनाथ यात्रा मार्ग की देखरेख और गाइड के तौर पर मलिकों ने अहम भूमिका अदा की है। अमरनाथ यात्रा के दौरान बीमारों, बुजुर्गों की सहायता और श्रद्धालुओं को गुफा तक की सारी यात्रा कराना मलिक अपनी पहली प्राथमिकता समझते हैं। आज भी अमरनाथ यात्रा के दौरान जो चढ़ावा होता है, उसका चौथाई हिस्सा मुसलमान गडरिये के वंशजों को ही मिलता है। जिसे हम गुज़र ( बाकरवल) के नाम से जाना जाता है,,,

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पवित्र गुफा मे जाने के लिए दो रास्ते हे,
श्री अमरनाथ गुफा मे जाने के लिए श्रद्धालु खुदके सुविधा के अनुसार दो रास्तों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। पहला रास्ता जम्मू से पहलगाम होते हुए पवित्र गुफा तक जाता है, जो करीब 50 किलोमीटर है। इसमें श्रद्धालुओं का जत्था पड़ाव-दर-पड़ाव आगे बढ़ता है। वहीं दूसरा रास्ता श्रीनगर से सोनामार्ग-बालटाल होते हुए करीब 145 किलोमीटर दूर है। यहां बालटाल बेस कैम्प से पवित्र गुफा की दूरी महज 14 किलोमीटर हे । हालांकि ये यात्रा मार्ग अति दुर्गम और कठिन माना जाता है। हर साल श्री अमरनाथ यात्रा के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड का गठन किया है। श्राइन बोर्ड यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पंजीकरण और तमाम सुविधाओं के लिए प्रयासरत रहता है।इस यात्रा के दौरान, बहुत दूरघटाना होती है,, पूरे सुरक्षा के लिए, फोर्स की तोइनत किया जाता है,, इस यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा अहम भूमिका निभा रहे हैं, INDIAN FORCE, ARMY, CRPF, BSF, J&K POLICE, और vi बहुत कुछ है,

जो koy vi अमरनाथ यात्रा करना चाहता है, ओ 27/6/2018 से 28/8/2018 तक हे, well come to बाबा बर्फ़नी

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