न मार खाऊंगा न चुगली करूँगा

markchu(52)
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लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक बचपन से ही सचाई के प्रवर्तक थे। वे स्वयं कठोर अनुशासन का पालन करते थे, परंतु कभी भी किसी की चुगली नहीं करते थे। एक दिन उनकी कक्षा के कुछ छात्रों ने मूंगफली खाकर छिलके कक्षामे ही फेक दिए फैला दिए । कुछ देर बाद जब प्रध्यापक आए तो कक्षा में फैले छिलके देखकर हैरान होगये । उन दिनों प्रध्यापक बेहद कठोर हुआ करते थे।

प्रध्यापक ने पूछा तो किसी भी छात्र ने अपनी गलती नहीं स्वीकारी। इस पर प्रध्यापक ने सारी कक्षा को दंडित करने का निश्चय किया और अपनी छड़ी निकाली। उन्होंने कक्षा में उपस्थित छात्रों से कहा, ‘बारी-बारी से आओ और हाथ आगे बढ़ाओ’। छात्र हाथ आगे करता और अध्यापक उस पर तड़ातड़ बेंत जड़ देते। जब तिलक की बारी आई तो उन्होंने अपना हाथ आगे नहीं बढ़ाया। तिलक ने अपने हाथ बगल में दबा लिए और बोले, मैंने मूंगफली नहीं खाई है। इसलिए बेंत भी नहीं खाऊंगा। अध्यापक ने कहा, ‘तो तुम सच-सच बताओ कि मूंगफली किसने खाई है?’
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‘मैं किसी का नाम नहीं बताऊंगा और बेंत भी नहीं खाऊंगा’

तिलक ने कहा।

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