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बीरबल की चतुराई

jj8100(0)
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बहुत पुराने समय की कहानी है। एक बार अकबर बादशाह का दरबार लगा था।
दरबार में सारे दरबारी, पंडित, मंत्री और सामान्यजन भी बैठे हुए थे। उस समय दरबार में हंसी-ठिठोली का माहौल छाया हुआ था। सब उसी में मशगूल थे। अकबर भी बहुत खुश नजर आ रहे थे।

लेकिन एक बात थी जो अकबर को हमेशा ही खटकती रहती थी, वह यह कि राजदरबार के सभी दरबारी बीरबल के फैसले से बहुत जलते थे। बीरबल के आगे उनके फैसले की एक न चलती थी।
इसलिए उन्हें बीरबल से बहुत ईर्ष्या थी, लेकिन वह बीरबल के सामने बोलने की हिम्मत जुटा नहीं पाते थे। बीरबल की दरबार में अनुपस्थिति होने पर अकबर हमेशा बीरबल की प्रशंसा के पुल बांधते रहते थे।

जब बीरबल दरबार में अनुपस्थित रहता था तब दरबारी बीरबल के प्रति द्वेष का भाव रखकर अकबर बादशाह को भड़काने का काम करते रहते थे। लेकिन अकबर को बीरबल की चतुराई पर बहुत भरोसा था। दरबार में चल रही हंसी-ठिठोली के बीच अकबर ने दरबारियों की परीक्षा लेने का मन ही मन विचार बनाया।

उन्होंने सभी दरबारियों से शांत होने को कहा, और बोले- 'ध्यान से सुनो, तुम सभी को मेरे एक सवाल का जवाब देना है। जो इस सवाल का जवाब सही देगा और उसे साबित कर दिखाएगा उसे मैं बीरबल की जगह अपना मंत्री नियुक्त कर दूंगा।'

अकबर ने कहा- 'देखो तुम सबके लिए बहुत बढ़िया अवसर हाथ आया है। इससे तुम अपने मन के सभी अरमान पूरे कर सकते हो।'

यह सुनकर सभी दरबारी बहुत खुश हुए। अकबर ने फिर अपना सवालिया बाण छोड़ा और कहा, 'देखो, तुम्हें यह साबित करना है कि मनुष्य द्वारा निर्मित चीज ज्यादा अच्छी होती है या कुदरत के द्वारा निर्मित।'

अकबर के मुंह से सवाल सुनते ही सभी दरबारी सोच में पड़ गए। अकबर ने उन्हें पूरे एक हफ्ते का समय दिया और कहा अगले शुक्रवार को जब दरबार लगेगा तो तुम्हें खुद को सबसे श्रेष्ठ साबित करना है। सब दरबारी अपने-अपने घर को हो लिए। सभी इसी सोच में डूबे थे कि इसबात को कैसे साबित किया जाए। लेकिन किसी में इतनी चतुराई भी तो नहीं थी जितनी कि बीरबल में।

आगे पढ़े दरबारी क्यों नहीं ढूंढ़ पाए सवाल का जबाब................................................................................................................................

बीरबल की चतुराई | Ecency