वो परिन्दा

jaimin00(31)
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#pray
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घने बादलों से था जब,
आकाश सारा भर गया...!
उड़ता हुआ वो परिन्दा,
बहुत ही था डर गया...!!

जब लगी थी आँधियाँ,
पंखों को उसके नोचने!
क्या यहीं तक सफर था...?
वो लगा था सोचने...!!
तब रोम-रोम उसका,
निराशा से था भर गया...!!!
उड़ता हुआ वो परिन्दा...

कड़क-कड़क कर बिजलियाँ,
थी उसको लगी डराने...!
जला न दे ये कहीं मुझे,
था डर लगा सताने...!!
बादलों का गर्जना और भी था बढ़ गया...!!!

उड़ता हुआ वो...

सूरज की इक किरण से,
था सिमट गया अंधेरा...!
थम गई थी आँधियाँ,
था जागा नया सवेरा...!!
एक पल की प्रार्थना से सारा संकट टल गया,
उड़ता हुआ वो परिन्दा..

वो परिन्दा | Ecency