कैसी अजीब विडंबना है
बढ़ते हुए भ्रष्टाचार को कैसे रोकू में ,आज हर जगह भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार फैला हुआ है जिसका में खुद आज पीड़ित हु,अगर नगर पालिका या तहसील में कोई काम करवाना है तो रिश्वत तो देनी ही है अन्यथा आपका वैधानिक काम भी रुकेगा जिसे आपको पेसो के बिना सोचना भी एक अपराध है और आप अपराधी है अगर आपने रिश्वत में आनाकानी की है तो, आज कार्यपालिका हो या न्यायपालिका हो या प्रशाशनिक सभी जगह पर ऐसा लगता है कि यहां तो।रिश्वत को मान्य ही कर देना चाहिए ,क्यो की वहाँ पर किस मजबूर गरीब या किसी बेसहारा पर दया नही देखी जाती है यह तो हर आने वाला शख्स एक मुर्गा होता है जो इनके हलाल करने और उसकी बोटी बोटी नोच कर खाने पर भी उसे नही बख्शा जाएगा।