मत सोचो कि चार लोग क्या कहेंगे...

banzzara(56)
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भारतीय समाज में चार लोगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है। यह कहना अतिस्युक्ती नहीं होगी कि ये चार लोग ही प्रायः समाज के पिछड़ेपन के लिऐ जिम्मेदार हैं।

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मैं इस मान्यता के साथ यह लेख लिख रहा हूं कि आप सब लोग इन "चार लोगों" से परिचित ही होंगे और हों भी क्यूं ना, चार लोग क्या कहेंगे इसके डर से तो हमारा समाज चलता है। समाज में कोई बदलाव ना आने पाए या कोई विकास ना होने पाए इस कार्य की जिममेदारी शुरू से ही चार लोगों हाथ में सौंप दी गई है।

आपके पास दो ही रास्ते हैं या तो आप चार लोगों की सुनते सुनते उन्हीं चार लोगों में सम्मिलित हो जाएं या चार लोग क्या कहेंगे इसकी परवाह किए बगैर अपना कार्य सिद्ध करें।

समाज कभी नहीं चाहेगा कि कोई उसके रूप में बदलाव लाए क्यूंकि उसे परिवर्तन पसंद नहीं है और इसी लिए उसने चार लोगों को पहरेदार बनाया होता है अपने पुरातन के संरक्षण का। अतः यह एक तरह का कुचक्र है जिससे निकलना वैसे तो काफी मुश्किल है पर असंभव नहीं। एक बार निकाल जाने पर आप समाज को नए पथ पर प्रशस्त करेंगे और वहीं से नए समाज का उद्भव होगा।

आपने अपनी सारी उम्र इसी चिंता में निकाल दिए कि समाज क्या कहेगा लेकिन आपको समझना चाहिए कि समाज सफलात का पुजारी है अतः एक बार यदि आप अलग रास्ते पर चलकर सफलात चूम लेते हैं तो वही चार लोग आपके कदम चूमेंगे।

अतः मत सोचिए कि चार लोग क्या कहेंगे या समाज क्या कहेगा। आपको विचार करना है कि समाज को चलाना चाहते हैं या समाज चलना चाहते हैं। लेकिन याद रखियेगा सम्मान उन सिद्ध पुरूषों का ही होता है जो समाज को आइना दिखाते हैं।

नमस्कार।


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धन्यवाद।

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