इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना

Words
217
Reading
1 min
9y
Listen to this post
~1 min

IMG_0486.PNG

एक बेटे ने पिता से सवाल पूछा कि
पापा.. 'सफल जीवन' क्या है ?
एक दिन
पिता, बेटे को पतंग उड़ाने ले गए।
बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था...

थोड़ी देर बाद बेटा बोला-
पापा ये धागे की वजह से पतंग और ऊपर नहीं जा पा रही है, हमे इसे तोड़ देना चाहिये तो ये और ऊपर चली जाएगी...

बस फिर पिता ने धागा तोड़ दिया ..

पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आयी और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई...

तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया...

बेटा..
हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं जहाँ हम पहुँचना चाहते हैं ।
जैसे :
-घर-
-परिवार-
-अनुशासन-
-माता-पिता-
-गुरू-और-
-समाज-
और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं...

वास्तव में ये वही धागे हैं जो हमें ऊंचाई पर बना के रखते हैं..
'इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे परन्तु बाद में हमारा वो ही हश्र होगा जो बिन धागे की पतंग का होता है

"जीवन में अगर तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.."

"धागे और पतंग के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही 'सफल जीवन' कहते हैं.."

इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना | Ecency