Ek sher

Words
33
Reading
1 min
8y
Listen to this post
~1 min

IMG_20180430_193125.png
कभी ख़ुद रूठ जाता है, कभी मुझको रुलाता है
हमारा यार पर अक़्सर, हमीं को गुनगुनाता है

मुहब्बत की अगर बारिश, कहीं मुझको भिगोए तो
वहीं आके सनम मेरा, फुहारों में नहाता है