उनकी ईमानदारी के दूर-दूर तक चर्चे थे । उनके बच्चे अब जवान हो चुके थे ।एक दिन छ्ज्जू मल सोच रहे थे क्यों ना दुकान की जिम्मेदारी बच्चों को देकर सारा समय भगवान की भक्ति में लगाया जाए । क्योंकि उम्र भी 60 साल की हो चुकी थी परंतु फिर उनके मन में सोच विचार शुरू हो जाते हैं कि अभी तो उनके सिर पर बहुत सारी जिम्मेदारियां बाकी हैं अभी तो उन्होंने अपने पोतों को भी पढ़ाना लिखाना है जिम्मेवार बनाना है ।
एक दिन में सड़क किनारे चले जा रहे थे झाड़ू लगाने वाली महिला ने कहा सेठजी एक तरफ हो जाइए बीच में रहोगे गंदगी लग जाएगी इस तरफ या उस तरफ हो जाइए । झाड़ू वाली की बातें सेठ जी को समझ में आ गई उन्होंने ठान लिया कि अब दुकान की जिम्मेदारी अपने बेटों को देकर पूरा समय भगवान की भक्ति में लगाएंगे । दो कश्तियों पर पांव रखना सही नहीं । इसलिए उन्होंने दुकान पर जाकर दुकान कर सारा काम अपने बेटों को सौंप दिया । वही छ्ज्जू मल आगे चलकर भगत छ्ज्जू मल के नाम से प्रसिद्ध हुए ।