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वो हुस्न परी आंखो मे वशी
क्या लगती थी वो नूर परी
ज़िद सपनो मे भी करती थी
वस आंखो पे वो मरती थी
मानो रब की हिदायत मान गई
पल भर मे मानो जान गई
पल भर ना उस को छोडा है
दिल को एक कशौती पर मोडा है
है जुनून मेरा तु बन जाना
दिल को एक कशौटी पर समझाना
अब ना सपनो मे भी चाहा है
बस अपनी ही ज़िद पर पाया है
एक नूर जहा पे हूस्न अडे
देखे थे सपने बडे बड़े
मर्यादा का ना मान रहा
वस अपने आप को जान गया
छूट तो थी निरंकार मान की
चन्द दिनो की झूटी सान की
एक प्रण ने मुझ को जोड दिया
कही दूर कशौटी पर छौड दिया
अब ना सपनो मे भी चाहा है
वस् अपने आप को पाया है
वो हुस्न परी आंखो मे वशी
दिल के दरवाजे से दूर खडी