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पिता की तकलीफ देख 13 साल के बच्चे ने खड़ी की कंपनी, 2 साल में 100 करोड़ कमाने का प्लान

ramyadav(29)
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#india
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8वीं कक्षा में पढ़ने वाले तिलक मेहता ने एक लॉजिस्टिक कंपनी 'पेपर्स एन पार्सल्स' की स्थापना की।

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नई दिल्ली. पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। मुंबई के 13 साल के एक बच्चे पर यह कहावत सही साबित हुई है। उसने छोटी सी उम्र में न सिर्फ एक कंपनी खड़ी कर दी और 2 साल में 100 करोड़ रुपए कमाने का टारगेट भी तय किया। एक बैंकर को बच्चे का आइडिया इतना शानदार लगा कि वह अपनी नौकरी छोड़कर उसकी कंपनी का सीईओ बनने को भी तैयार हो गया। हम 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले तिलक मेहता की बात कर रहे हैं, जिसने एक लॉजिस्टिक कंपनी 'पेपर्स एन पार्सल्स' की स्थापना की।

कैसे मिला बिजनेस आइडिया

मुंबई के सबअर्बन एरिया में रहने वाले तिलक मेहता का कहना है कि उसे बिजनेस शुरू करने का आइडिया अपने पिता से मिला। उसके पिता विशाल मेहता एक लॉजिस्टिक कंपनी में चीफ एक्जक्यूटिव थे। काम से लौटने के बाद उनको थके-हारे देखकर मन उदास हो जाता था। अपने पिता तकलीफों को देख उसे लॉजिस्टिक सेक्टर में बिजनेस शुरू करने का आइडिया मिला।

बच्चे के आइडिया पर बैंकर ने छोड़ी नौकरी

'पेपर्स एन पार्सल्स' की शुरुआत करने वाले तिलक ने अपने बिजनेस आइडिया के बारे में एक बैंकर को बताया। बैंकर को उसका आइडिया इतना अच्छा लगा कि उसने अपनी जमी जमाई नौकरी छोड़कर कंपनी का चीफ एग्जक्यूटिव बनने को तैयार हो गया। साथ ही उसने बिजनेस बढ़ाने की प्लानिंग के तहत डब्बावाला के साथ हाथ मिलाया ताकि पार्सल की डिलीवरी दूरदराज तक पहुंच सके।

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4 महीने रिसर्च के बाद शुरू किया बिजनेस

8वीं पास तिलक ने अपने बिजनेस की शुरुआत करने से पहले 4 महीने तक इस पर रिसर्च किया। उसके पिता ने भी अपने बेटे का साथ दिया। उसने लॉजिस्टिक सर्विस की जानकारियां तिलक को दी। उसके पिता विशाल मेहता एक लॉजिस्टिक कंपनी के चीफ एग्जक्यूटिव हैं।

300 डब्बावाला को बनाया पार्टनर

पार्सल की डिलिवरी के लिए तिलक ने 300 डब्बावाला को अपना पार्टनर बनाया और 200 लोगों को काम पर रखा। 'पेपर्स एन पार्सल्स' रोजाना 1200 पार्सल्स की डिलीवरी करती है। एप के जरिए कोई भी कस्टमर्स अपना ऑर्डर दे सकता है। सेम-डे डिलीवरी दोपहर 2.30 बजे के पहले हो जाती है।

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40 से 180 रुपए पार्सल का है चार्ज

तिलक की लॉजिस्टिक कंपनी 3 किलो पार्सल तक डिलीवरी करती है। कंपनी 40 से 180 रुपए वजन के अनुसार चार्ज करती है।

बैंक की नौकरी छोड़ तिलक की कंपनी के सीईओ बने घनश्याम पारेख ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य इंट्रा-सिटी लॉजिस्टिक मार्केट के 20 फीसदी हिस्से पर काबिज होना तथा 2020 तक 100 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करना है।

source... https://bit.ly/2NrVjMA

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