ग़ज़ल # 6

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ग़ज़ल

कुछ दिन से ये लगता है बहुत शाद नहीं वो ।
दुश्मन की जो कर पाते हैं इमदाद नहीं वो ।

लगता है उन्हें क़ौम के हैं वो ही मसीहा ,
अल्लाह को करते जो कभी याद नहीं वो ।

जो लोग किया करते हैं लाशों पे सियासत ,
क्या तुमको भी लगता है कि जल्लाद नहीं वो ।

देते हैं सरेआम हुक़ूमत को वो गाली ,
उस पर ये शिक़ायत है कि आज़ाद नहीं वो ।

इस मुल्क़ के आइन में नहीं जिनकी अक़ीदत ,
इस मुल्क़ में रह पाएँगे आबाद नहीं वो ।

उनका कहीं ग़द्दारों से रिश्ता तो नहीं कुछ ,
देते हैं मेरे शे'रों पे जो दाद नहीं वो ।

'नादान' कहो उनसे कि ये ख़्वाब न देखें ,
इस मुल्क़ को कर पाएँगे बर्बाद नहीं वो ।

                                         राकेश 'नादान'
ग़ज़ल # 6 | Ecency