Jumma mubarak

raamiz(49)
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दुनिया के ऐ मुसाफिर मंजिल तेरी कबर है ते कर रहा है जो तू दो दिन का यह सफर है दुनिया के ऐ मुसाफिर

दुनिया बनी है जब से लाखों-करोड़ों आए बाकी रहा न कोई मिट्टी में सब समाएं इस बात को ना भूलो सबका यह ही हसर है

दुनिया के ए मुसाफिर.

Jumma mubarak | Ecency