मनोदशा - कैलाश कल्पित

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मनोदशा - कैलाश कल्पित

वे बुनते हैं सन्नाटे को

मुझको बुनता है सन्नाटा

जीवन का व्यापार अजब है

सुख मिलता है, पाकर घाटा।

मनोदशा - कैलाश कल्पित | Ecency