एक 'गुलाब' (Hindi Poetry) -Thought #8

prvn77(50)
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Thought #8
Hindi Poetry

फूल, रंग-बिरंगे और खूबसूरत,
बगीचों की शोभा है जो,
खिलते और मुस्कुराते है,
जीना सिखाते है,
पर जब वो टूट जाते है,
बिखर जाते है, कुछ
होते है, खुशकिस्मत जो
किसी के हाथ आते है,
बनते है साक्षी
किसी प्रेम कहानी का,
फिर दब कर रह जाते है,
किसी पुरानी किताब के
पन्नों के बीच, जैसे कि
एक 'गुलाब', चटख लाल-
गुलाबी सा, एक नयी सी,
पुरानी किताब में,
मुरझाया हुआ, न जाने
कितनी सारी यादों को
समेटे हुए, अभी भी
जीवन ढूंढ़ रहा है।


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