नैनों की 'बारिश' (Hindi Poetry) -Thought #7

prvn77(50)
Published in
#rain
Words
119
Reading
1 min
9y
Listen to this post
~1 min

Thought #7
Hindi Poetry

बारिश, पर मौसम
तो ऐसा नहीं है,
अभी तो दस्तक नहीं दी,
गर्मी ने भी ठीक से,
बसंत की महक,
अभी बाकी है,
फूलों में, झरनों में,
फिर क्यों लगती,
बेगानी सी, ये हवा,
रास्ते क्यों लगते वीराने से,
उगता हुआ सूरज,
मुरझाता नजर आता है,
बूंदे गिरती है पर,
कोई भीग नहीं पाता,
बारिश होती है पर,
कोई देख नहीं पाता,
भीग जाता हूँ पर मैं,
हर बार, बार-बार,
कैसी है ये अजीब बारिश,
जो बिन मौसम आयी है,
यादों की परछाई,
साथ लायी है,
पूछ रहा हूँ मैं,
खुद से, और अपनी
तन्हाई से,
कब होगी ख़त्म,
बेमौसम आयी,
इन भीगे नैनों की 'बारिश'।


Image Source - Pixabay

Click Here and Follow !!
d0243e33-8485-4e30-af83-b5455abf35e5.jpg

नैनों की 'बारिश' (Hindi Poetry) -Thought #7 | Ecency