बे हिचक अपनी सजा सुनाया कर,
खुदा है खुदा की तरह पेश आया कर,
क्या मंदिर क्या माजिद में रहता है,
कभी इनसे बाहर नज़र आया कर,
पूर्वजो से सुने है चरचे तेरी दरिया-दिली के,
हमे भी कुछ अपनी दरिया-दिली दिखाया कर,
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composed by Pranshu Tyagi