हमे छोड़ कर, ना जाओ कहीं
यूँ ही रेत की तरह, ना उडाओं कहीं
बिखर ज़ायेंगे हम, इन फिजां ओ में यू
ज़िधर से गुजरो गे, तुम
पाओ गे हमको वहीं,
दूर तक बस निगा हो में तुम हो बसे,
कभी चाँद कभी फूल कभी रूह से बंधे
कैसे इनसे खुदको छुडा पाओ गे तुम,
लाख कारोगे भी कोशिश , पाओ गे हमे यही कहीं