नमस्कार दोस्तों
कैसे हैं, आप सभी।
वक़्त कभी भी एक सा नही रहता दोस्तों। कभी अच्छा तो कभी बरा। वक़्त जब अच्छा चल रहा होता हैं तो दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं, और वक़्त जब बुरा चल रहा होता हैं, तो अपने भी पराये हो जाते हैं।
बुरे वक़्त की एक भलाई हैं,कि वो अपनो और परायों की पहचान अच्छे से करवा देता हैं। वर्ना अच्छे वक़्त में इनकी पहचान सम्भव ही नही हो पाती।
वक़्त के साथ आप अपने आप को जरुर बदलते रहे, पर अपने व्यवहार को सम रखे। बुरे वक़्त में जिसने आपका साथ दिया, असल में वही हैं, जिसे आपकी परवाह हैं। यदि अच्छे वक़्त में आपने उसको खो दिया, तो आपने अपने सच्चे हितेषी को खो दिया।
अपने आप पर नियन्त्रण की आवश्यकता अच्छे वक़्त मे ज्यादा होती हैं। बुरा वक़्त तो आपका दिमाग खराब होने ही नही देगा।
बुरे वक़्त में बुरे ख्याल आना स्वाभविक हैं। बस उनसे बचने का उपाय सिर्फ और सिर्फ आपकी संगती हैं। उस वक़्त बुरे वक़्त के अपने हितेषी से अपने मन की सारी बातें जरुर शेयर करते रहें। वो आपकी और कोई सहायता करे न करे, आपको पूरे मनोयोग से सुनकर आपका मन जरुर हल्का कर देगा। आपकी मानसिकता की नकारात्मकता को सही दिशा देने का प्रयास जरुर करेगा।
मेरे इन विचारों पर आप अपनी राय जरुर लिखे।
प्रसन्न रहें।
शुभ रात्री।