One Poem on Himalayas

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चल फिकर को गंगा में
बहा देते हैं,
आज से अंत तक चलेंगे साथ
खुदसे ये वादा लेते हैं,
यूँ ही यहां से वहां फिरेंगे
आवारा बेखौफ से,
पड़े-पड़े देवदारों के नीचे
मजे लेंगे सुनके लोफ के,
हर की पौड़ी पे फ़ोनों को
स्वाहा कर देंगे,
संगम पे देवप्रयाग के
तेरे नाम दूआवा कर देंगे,
रुद्रप्रयाग की जड़ों से
बांध भूख को चलेंगे,
जब पेट ही नहीं होगा
तब आत्मा को प्रेम से भरेंगे,
जोशीमठ में हर विकार
जला जाएंगे,
नंदा के सामने बैठेंगे
और कहां जाएंगे,
शरीर तत्व पंच का
अर्पण बद्री को कर जाएंगे।

Here are some photos from my last visit of Lord Badrinath temple which is situated in Uttarakhand, North India.

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