HAJI KAASAM KI BIJALI स्टीमर (हाजी कासम की बिजली के नाम वाली नाव)
(हाजी कासम की बिजली के नाम वाली नाव) एक महान गाथा जिसके लिए कही गाने बने और आज भी टाइटेनिक के बाद सबसे ज्यादा याद की जानेवाली ये बिजली टाइटैनिक से 24 साल पहले आरबी समुद्र में डूब गई जिसमें 746 लोगो की जान ली थी।
असल मे इस नाव का नाम S S VAITRANA था जिसकी मालिकी कंपनी शैफर्ड & co थी। 1885 में ये बनके तैयार हुई थी । 170 फ़ीट लंबी और 27 फ़ीट चौडी इस नाव में 73 हॉर्स पावर का इंजिन था। इस मे पेहली बार बिजली के बल्ब लगाए गये थे जिस से इसको "बिजली" का nick नाम मिला। मांडवी kutch से मुंबई के बीच इस को फेरी के तौर पर चलाया गया। तकरीबन30 घंटो में ये अपना सफर पूरा करती थी। इसकी ticket 8 रुपये थी। हाजी कासम इस नाव के कप्तान थे।
8 नवम्बर 1888 के दिन इस नाव ने अपना आखरी सफर मांडवी से सुरु किया था। मांडवी से इसमें ३० दूल्हे बैठे जो शादी करने के लिए मुंबई जा रहे थे। कुछ स्टूडेंट्स भी इसमें सवार हुए जो अपनी एग्जाम देने के लिए मुंबई जा रहे थे। 520 लोग इसमे सवार हुए और नाव द्वारका की ओर रवाना हुई जहा से ओर पैसेंजर बैठ ने वाले थे। दुपहर में द्वारका से पैसेंजर लेकर ये मुंबई की ओर चल पड़ी । पोरबंदर पहुच ने से पहले दरिया में एक भारी तूफान आया और नाव बहुत बिक्री हालात में फस गयी थी।
पोरबंदर कंट्रोल ने नाव को अपना सफर रोकने को कहा पर नाव तूफान में फस चुकी थी और फिर मांगरोल के पास दरिया में इसे आखरी बार देखा गया। उसके बाद आज तक ना बिजली मिली न उसमे सवार 746 लोग मिले।
इस घटना ने पूरे विश्व मे हहकार मचा दिया था। क्योंकि टाइटेनिक 24 साल के बाद डूबने वाली थी। हाजी कासम इब्राहिम की ये बिजली को आज भी गीतों से याद किया जाता है। हाजी कासम मुंबई के मालाबार हिल जैसे पोश जगह में रहते थे। उनके पास 99 नाव थी। बिजली उनकी आखरी नाव थी। कहते है हाजी कासम को एक फ़क़ीर ने आशीर्वाद (दुआ दी ) थी।
जिसकी वजह वो बडा आदमी बना था। हाजी कासम ने अगली रात को अपनी बिजली डूब ने का सपना देखा था। जब नाव पर पेर रखा तब उनका पैर फिसल कर उनको चेतावनी दे रहा था फिर भी उन्होंने सफर को रोका नही था। कुछ लोग आज भी कहते है के पोरबंदर के दरिया में कभी कभी बिजली की चिमनी (धुंवा निकाल ने वाली ) देखी जा सकती है। लेकिन ये myth है।
इन्फॉर्मेशन सेंट् बाय @godsteem