कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन
सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी
सुकून की बात मत कर ऐ दोस्त
बचपन वाला इतवार अब नहीं आता
कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन
सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी
सुकून की बात मत कर ऐ दोस्त
बचपन वाला इतवार अब नहीं आता