ब्लूटूथ के बारे में जानिए एक मज़ेदार जानकारी

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ईसवी सन 940 से 981 तक डेनमार्क पर राज करने वाले सम्राट हेराल्ड ब्लांटेड ब्लूटूथ के नाम से पहचाने जानेवाली इस टेक्नोलॉजी की खोज स्वीडिश कंपनी एरिक्सन ने की है।

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सम्राट ब्लांटेड हमेशा जामुन कलर की बेरी (फल) खाया करते थे जिससे उनके दांत ब्लु कलर के दिखते थे और इसीसे टेक्नोलॉजी का नाम ब्लूटूथ रखा गया। ब्लूटूथ टेक्नोलॉजी के आविष्कार के बाद कंप्यूटर, कीबोर्ड, डीवीडी प्लेयर, मोबाइल फोन, प्रिंटर, टेलीविजन, मोबाइल इयरफोन ओर हेडसेट जैसी इलेक्ट्रॉनिक चीजो को जोड़ने वाले लंबे लंबे और बड़े केबल वायर की zanzat से छुटकारा मिल गया। bluetooth में केबल की जरूरत नही होती piconet कहे जाने वाले नेटवर्क के इस्तेमाल किया जाता है जो एक

सीमित एरिया में वायरलेस रेडियो के मोजो से रचा जाता है। इलेक्ट्रॉ मैग्नेटिक पटल में 2.402 गीगाहर्टज से 2.480 गीगाहर्टज की फ्रेक्विसी बैंड को ब्लूटूथ के लिए अनामत (आरक्षित) रखा गया है। इसमे सब मिलाकर 79 चैनल है जो एक साथ 8 इलेक्ट्रॉनिक चीजो (मोबाइल, tv, pc कार्ड etc) को जोड़े रखता है। bluetooth 10मीटर यानी 32फुट तक के एरिया को कवर कर के आपको सेवा देता है।
Bluetooth आज भी एक सक्रिय चीज है जिसको कार में लगाना जरूरी समझा जाता है।

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पहले लोग एक दूसरे के मोबाइल के डेटा, पिक्चर, vdo को लेते देते थे पर आज ये उतना इस्तेमाल नही होता। ब्लूटूथ से कुछ मोबाइल में वायरस आने का खतरा हो सकता है। एक दूसरे के साथ ब्लूएटूथ नेटवर्क मिक्स ना हो जाये इसके लिए ब्रॉडकास्टीng पावर 1मिलिवोट से कम रखा जाता है। डेटा ट्रांसमीट करता हुआ इंस्ट्रूमेंट हर सेकंड में 1600 बार अपनी फ्रीक्वेंसी बदल ता रहता है जिस से डेटा मिक्सिंग का खतरा नही रहता। ईतनी सी है ब्लूएटूथ कि कहानी सुना देना जिसको हो सुनानी।👍
हर रोज नई टेक्नोलॉजी मार्केट में आती है और पुरानी हो जाती है। देखते है ब्लूटूथ कब तक टिकेगा ।

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