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हमारे आँगन में छठ की रोशनी”

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कहानी: “हमारे आँगन में छठ की रोशनी”

हर साल की तरह इस बार भी हमारे घर में छठ पर्व की तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो गई थी। माँ सुबह-सुबह उठकर आँगन को गोबर और मिट्टी से लीपतीं, ताकि साफ-सुथरा माहौल रहे। बहनें केले के पत्ते, सुप, नारियल, गन्ना और ठेकुआ बनाने का सामान जुटा रही थीं। पूरा घर मानो खुशियों और श्रद्धा की महक से भर गया था।

मैं दूर शहर से नौकरी छोड़कर खास इस पर्व के लिए घर लौटा था। ट्रेन से उतरते ही गांव की मिट्टी की खुशबू और घर की रौनक देखकर दिल भर आया। पिता जी छठ घाट की सफाई करवा रहे थे, ताकि व्रत करने वाली महिलाएं आराम से पूजा कर सकें। पड़ोसी, रिश्तेदार, सब मिलजुलकर काम कर रहे थे — यही तो छठ की खूबसूरती है, एकता और भक्ति का संगम।

शाम को नहाय-खाय की रस्म शुरू हुई। माँ ने नए कपड़े पहने और साफ सुथरे कमरे में प्रसाद बनाया — कद्दू, चने की दाल, और चावल। पूरा घर घी की खुशबू से महक उठा। उस वक्त किसी के चेहरे पर थकान नहीं थी, बस एक अलग ही श्रद्धा थी।

दूसरे दिन खरना का व्रत था। माँ ने पूरा दिन बिना पानी के व्रत रखा। जब शाम को सूरज ढलने लगा तो उन्होंने गंगाजल से स्नान किया और खरना का प्रसाद बनाया — गुड़ की खीर और रोटी। जैसे ही प्रसाद बांटा गया, घर के सब सदस्य माँ के चारों ओर इकट्ठा हो गए। माँ ने आशीर्वाद दिया — “छठी मैया सबका भला करें।”

तीसरे दिन जब घाट पर जाने का समय आया, तो पूरा परिवार सजे हुए थालों के साथ निकला। थाल में दीप, ठेकुआ, फल, और गन्ने थे। रास्ते में हर घर से “जय छठी मईया” की आवाज़ गूंज रही थी। बच्चे फूलों की टोकरी लेकर हँसते हुए दौड़ रहे थे।

घाट पर पहुँचकर जब डूबते सूरज को अर्घ्य दिया गया, तो पानी में झिलमिलाते दीये देख दिल भर आया। आसमान नारंगी रंग में रंग गया, और सब तरफ बस श्रद्धा का सन्नाटा था। माँ, बुआ, और दादी सब हाथ जोड़कर गा रही थीं —
“कांच ही बांस के बहंगिया, बहिंया लचकत जाए…”

सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देने का पल सबसे खास था। सूरज की पहली किरण जब पानी पर पड़ी, तो ऐसा लगा जैसे पूरा संसार सुनहरी चादर से ढक गया हो। सबकी आंखों में आंसू थे, लेकिन दिल में शांति और उम्मीद।

उस दिन मुझे समझ आया — छठ सिर्फ एक पूजा नहीं है, ये एक एहसास है, अपनेपन का, त्याग का, और माँ के अटूट विश्वास का। जब घर लौटे, तो माँ ने कहा —
“छठी मईया सबका मंगल करें।”

और सच में, उस पल लगा कि घर के हर कोने में आशीर्वाद की रोशनी फैली हुई है।

🪔 विवरण (Description):

यह कहानी एक ऐसे परिवार की है जो हर साल श्रद्धा और प्रेम के साथ छठ पर्व मनाता है।
कहानी बताती है कि किस तरह घर की तैयारियों से लेकर घाट पर अर्घ्य देने तक — हर पल में भक्ति, एकता और आशीर्वाद की रोशनी फैली रहती है। 🌅
छठ केवल एक पूजा नहीं, बल्कि अपनेपन, त्याग और माँ छठी मैया के अटूट विश्वास का प्रतीक है। 🙏


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