जब भट्ट जी ने मुझसे सलाह मांगी।

Words
320
Reading
2 min
10h
Listen to this post
~2 min

Greetings friends!

नमस्कार मित्रों!

(pixabay free image)

एक दिन हमारे मित्र भट्ट जी बहुत परेशान दिख रहे थे। मैंने पूछा कि भट्ट जी क्यों परेशान हैं, तो भट्ट जी ने जो बताया कि आजकल उनको नींद नहीं आती है। उन्होंने मुझसे सलाह मांगी। मैंने तुरंत उनको सलाह दी कि रोज शाम को दो पेग लिटल लिटल लेना शुरू कर दो, मजे की नींद आएगी। भट्ट जी बोले कि क्या इससे वास्तव में फरक पड़ेगा, क्या मेरी परेशानी खतम हो जाएगी? मैंने कहा कि जब दो पेग के चक्कर में मेरे पिताजी की पूरी प्रॉपर्टी चली गई तो आपकी समस्या तो बहुत छोटी है, ये तो बड़े आराम से चली जाएगी।

भट्ट जी को मेरी सलाह उचित लगी। लेकिन भट्ट जी भी डेढ़ सयाने आदमी हैं। तुरंत बोले कि अपने पैसे से आज तक नहीं खरीदा, अगर कोई पिला दे तो पी लूँगा। मैंने तुरंत उनको दावत दी। शाम को एक बार में हम दोनों बैठे। मैंने भट्ट जी के लिए बढ़िया इंतजाम किया। महंगी स्काच ह्विस्की का ऑर्डर किया। भट्ट जी ठहरे नए शौकीन। जितना चखना आया, उसमें से 75 प्रतिशत तो वे अकेले साफ कर गए। मैंने सोचा कि वे नए नए शौकीन हैं, पर मैं गलत निकला। उन्होंने पूरे छह पेग खत्म किए। फिर उनको चढ़ गई। उसके बाद उन्होंने मुझे अपने कारनामों की वो कहानियाँ सुनाई कि मेरे कानों से खून निकल गया। वेटर से भी उलझ गए। खैर, भट्ट जी को समझा बुझाकर किसी तरह उनके घर पहुंचाया।

अगले दिन उनकी पत्नी मेरी पत्नी से कह रही थी कि भट्ट जी बहुत बढ़िया आदमी हैं, बहुत कम पीते हैं पर पता नहीं कौन इनको ऐसे कमीने कुत्ते दोस्त मिलते हैं जो रोज जबरदस्ती दारू पिलाकर घर भेज देते हैं।

हे प्रभु, श्री हरी, जगन्नाथ ये क्या हुआ? भट्ट जी रोज के पीने वाले निकले और मैं समझा कि मैं उनको सिखा रहा हूँ। वे तो गुरु नहीं बल्कि गुरुघंटाल निकले।

आप चीटिंग करते हैं भट्ट जी। 😒😒

जब भट्ट जी ने मुझसे सलाह मांगी। | Ecency