Janmashtami in Hindi /english

Hello friends how are you all I hope you all are well and healthy.
Today's post is about Janmashtami which is celebrated as the birthday of Lord Krishna.
Lord Krishna was born between 11:00 and 12:00 in the night in the prison of King Kansa of Mathura.
Lord Krishna's parents were Vasudeva and Devaki.
On the day of Janmashtami!
, all the temples of the country are decorated on the day of Krishna Avatar.
Lord Krishna is worshiped on this day and Prasad is distributed.



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Story of Shri Krishna Janmashtami:-

In Dwapar Yuga, the atrocities of the demons started increasing on the earth.
The earth took the form of a cow and went to Brahma to narrate her woes.
Brahma ji took all the devta and the earth and went to Lord Vishnu in Ksheer Sagar.
Lord Vishnu asked the earth and other gods the reason for coming there, on this the earth said, Lord, I am being burdened by the burden of sin, save me.
Hearing this, Vishnu said, I will take birth from the womb of Devaki, the wife of Vasudev in Braj Mandal.
All of you devta go to Brajbhoomi and assume your body in the Yadav dynasty, saying this, God should be in meditation.
After this the devta were born in the form of Nanda Yashoda and Gopa Gopis in Yadukul in Brajmandal.

At the end of Dwapar Yuga, Ugrasena king ruled. Ugrasen's son's name was Kansa.
Kansa removed Ugrasen from the throne and put him in jail and started ruling himself.
Kansa's sister Devaki was married to Vasudev of Yadav dynasty. When Kansa was going to send off Devaki, there was an Akashvani with the chariot, the eighth son of the one whom you are going to send off will kill you.
Hearing this, Kansa got ready to kill Devaki with anger, he thought that neither Devaki would remain nor he would have any son.
Vasudev explained to Kansa that you have no fear of Devaki, you are afraid of being the eighth son of Devaki.
Therefore I will hand over its eighth child to you. Do that with whatever comes to your mind.
Kansa accepted Vasudev's words and imprisoned Vasudev and Devaki.
Immediately Narad ji came there and started saying to Kansa, how will you know which is the eighth pregnancy, Kansa decided to kill all the children born from Devaki's womb.
Thus Kansa killed 7 children of Devaki one by one.
When Shri Krishna was born as the eighth child, then the light spread in the entire jail. In front of Vasudev and Devaki, the four-armed Lord Vishnu incarnated and said, I am going to be born from your womb, you immediately take me to Nanda in Gokul. And you bring his just-born daughter and give it to Kansa.
Immediately Vasudev's handcuffs opened and the doors opened on their own and Vasudev kept Shri Krishna in the bag and on the way, Yamuna rose to touch the feet of Shri Krishna, Lord Krishna took his feet out of the nugget and lowered the Jamuna. She fell by touching the feet of God.
Vasudeva crossed the Yamuna and reached Yashoda's place and after making Krishna sleep next to Yashoda, took the girl back to the prison.
On the crying of the girl, Kansa was informed that Kansa came to the prison and took the girl and started hitting her with a stone. But she got out of Kansa's hand and started flying in the sky and taking the form of Goddess, she started telling Kansa what is the use of killing me, your enemy has reached Gokul. Seeing this scene, Kansa was astonished and distraught.
Kansa sent many demons to kill Shri Krishna.
Shri Krishna killed all the demons with his supernatural illusion.
After killing Kansa, Ugrasen was placed on the throne.
From that day on the born anniversary of Krishna, Janmashtami is celebrated all over the country.

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नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी लोग मैं आशा करता हूं कि आप सब लोग अच्छे होंगे और स्वस्थ होंगे।
आज की मेरी पोस्ट जन्माष्टमी के बारे में जो कि कृष्ण भगवान के जन्मदिन जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है
भगवान कृष्ण का जन्म रात के 11:00 से 12:00 के बीच में मथुरा के राजा कंस की जेल में हुआ था।
भगवान कृष्ण के माता पिता वासुदेव और देवकी थे।
जन्माष्टमी के दिन देश के समस्त मंदिरों का सिंगार किया जाता है और कृष्ण अवतार की दिवस में झांकियां सजाई जाती हैं।
इस दिन भगवान श्री कृष्ण की आराधना की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।



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श्री कृष्ण जन्माष्टमी की कथा
द्वापर युग में पृथ्वी पर राक्षसों के अत्याचार बढ़ने लगे।
पृथ्वी गाय का रूप धारण कर अपनी व्यथा सुनाने ब्रह्मा के पास गई।
ब्रह्मा जी सभी देवताओं और पृथ्वी को लेकर भगवान विष्णु के पास क्षीर सागर में गए।
भगवान विष्णु ने पृथ्वी से और अन्य देवताओं से वहां आने का कारण पूछा इस पर पृथ्वी बोली भगवान मैं पाप के बोझ से दबी जा रही हूं मेरा उद्धार कीजिए।
यह सुनकर विष्णु बोले मैं ब्रज मंडल में वसुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से जन्म लूंगा
तुम सब देवता ब्रजभूमि में जाकर यादव वंश में अपना शरीर धारण करो इतना कहकर भगवान अंतर्ध्यान हो।
इसके बाद देवता ब्रजमंडल में यदुकुल में नंद यशोदा और गोप गोपियों के रूप में पैदा हो गए।

द्वापर युग के अंत में उग्रसेन राजा राज्य करते थे। उग्रसेन के पुत्र का नाम कंस था।
कंस ने उग्रसेन को गद्दी से हटा कर जेल में डाल दिया और स्वयं राज्य करने लगा।
कंस की बहन देवकी का विवाह यादव वंश के वासुदेव से हुआ। जब कंस देवकी को विदा करने जा रहा था रथ के साथ तब आकाशवाणी हुई जिसे तू विदा करने जा रहा है उसका आठवां पुत्र तेरा संघहार करेगा।
यह बात सुनकर कंस क्रोध से देवकी को मारने को तैयार हो गया उसने सोचा ना देवकी रहेगी ना उसका कोई पुत्र होगा।
वसुदेव ने कंस को समझाया तुम्हें देवकी से तो कोई भय नहीं है तुम्हें देवकी के आठवें पुत्र थे भय है।
इसलिए मैं इसकी आठवीं संतान को तुम्हें सौंप दूंगा। तुम्हारी समझ में जो आए उसके साथ वैसा करना।
कंस ने वासुदेव की बातें स्वीकार कर ली और वसुदेव और देवकी को कारागार में बंद कर दिया।
तत्काल नारद जी वहां आ पहुंचे और कंस से कहने लगे तुम्हें कैसे पता चलेगा कि आठवां गर्भ कौन सा है कंस ने देवकी के गर्भ से पैदा होने वाले सभी बालकों को मारने का निश्चय कर लिया।
इस प्रकार कंस ने देवकी के एक-एक करके 7 बालकों को मार दिया।
जब आठवीं संतान के तौर पर श्री कृष्ण का जन्म हुआ तब पूरे जेल में प्रकाश फैल गया वसुदेव और देवकी के सामने चतुर्भुज भगवान विष्णु ने अवतार लिया और कहा मैं अब तुम्हारे गर्भ से जन्म लेने वाला हूं तुम मुझे तत्काल गोकुल में नंद के वहां पहुंचा दो और तुम उनकी अभी-अभी जन्मी कन्या को लाकर कंस को दे दो।
तत्काल वासुदेव की हथकड़ी खुल गई और दरवाजे अपने आप खुल गए और वासुदेव श्री कृष्ण को डलिया में रखकर चल दिए रास्ते में यमुना श्री कृष्ण के चरणों को स्पर्श करने के लिए बढ़ गई भगवान कृष्ण ने अपने पैर डलिया से बाहर निकाल कर नीचे कर दिए जमुना भगवान के चरणों को छूकर घट गई।
वासुदेव यमुना को पार कर यशोदा के वहां पहुंचे और कृष्ण को यशोदा के बगल में सुलाकर कन्या को लेकर वापस कारागार में आ गई।
कन्या के रोने पर कंस को खबर दी गई कंस कारागार में आकर कन्या को लेकर गया और पत्थर पर पटक कर मारने लगा। लेकिन वह कंस के हाथ से छूटकर आकाश में उड़ने लगी और देवी का रूप धारण करके कंस से कहने लगी कंस मुझे मारने से क्या लाभ है तेरा शत्रु तो गोकुल में पहुंच चुका है। यह दृश्य देखकर कंस आश्चर्यजनक और व्याकुल हो गया।
कंस ने श्री कृष्ण को मारने के लिए अनेक दैत्य भेजें।
श्री कृष्ण ने अपने अलौकिक माया से सारे दैत्यों को मार डाला।
ड़े होने पर कंस को मार कर उग्रसेन को गद्दी पर बैठा दिया।
उसी दिन से कृष्ण के जन्मदिवस को सारे देश में जन्माष्टमी मनाई जाती है।

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