जीवनसाथी चुनाव भी बहुत आजीब काम है
जब हम अपने शादी के लिए अपने जीवन साथी को खोजते हैं
कुछ तसवीरें भी आते हैं
हम मिलने जाते हैं औऱ नापसंद कर देते हैं
कियू की हम सोंचते हैं हम को इससे भी अच्छी मिल सकती हैं
कुछ दिनों बाद फिर से एक तसवीर आता हैं फिर से हम मिलने जाते
इस बार दूसरी को देखने के बाद लगता हैं पहले वाली ही तो इससे अच्छी
बेवजह ही पहली वाली को नापसंद कर दिए
ये सिलसिला चलता रहता हैं और हम अकेले रह जाते लंबे समय तक
इसलिए दोस्तों चेहरा ज्यादा मायने नही राखते
अच्छा सोच होना चाहिये
कोइ अगर किसी से मिलेने जाओ तो चेहरा में फास के मत रह जाना
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