गिनती नही आती मेरी माँ को यारों,
मैं एक रोटी मांगता हूँ वो हमेशा दो ही लेकर आती है.
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जन्नत का हर लम्हा….दीदार किया था
गोद मे उठाकर जब मॉ ने प्यार किया था
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सब कह रहें हैं
आज माँ का दिन है
वो कौन सा दिन है..
जो मां के बिन है
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सन्नाटा छा गया बटवारे के किस्से में...
✍.... घर की इस बार
मुकम्मल तलाशी लूंगा!
पता नहीं ग़म छुपाकर
एक अच्छी माँ हर किसी
के पास होती है लेकिन...
एक अच्छी औलाद हर
माँ के पास नहीं होती...
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जब जब कागज पर लिखा , मैने 'माँ' का नाम
कलम अदब से बोल उठी , हो गये चारो धाम
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माँ से छोटा कोई शब्द हो तो बताओ
मंजिल दूर और सफ़र बहुत है .
छोटी सी जिन्दगी की फिकर बहुत है .
मार डालती ये दुनिया कब की हमे .
लेकिन "माँ" की दुआओं में असर बहुत है .
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माँ को देख,
मुस्कुरा लिया करो..
क्या पता किस्मत में
हज़ लिखा ही ना हो
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मौत के लिए बहुत रास्ते हैं पर....
जन्म लेने के लिए केवल
माँ ✍.
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माँ के लिए क्या लिखूँ ? माँ ने खुद मुझे लिखा है ✍🙏 😘
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दवा असर ना करें तो
नजर उतारती है
माँ है जनाब...
वो कहाँ हार मानती है।