यथा नाम तथा गुण, सदाबहार के गुणों को जानकर आप चौंक जायेंगे

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हमारे देश में कुछ ही लोग ऐसे होंगे जो सदाबहार से परिचित नहीं होंगे। सदाबहार एक झाड़ी नुमा पौधा है जो अपने सुंदर पुष्पों से सभी को आकर्षित करता है।
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सदाबहार को अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग नामों से जाना चाहता है। हिंदी नाम सदाबहार, बंगाली में नयनतारा और भूल फिरंगी मराठी में सदा फुल से जानते हैं, तो इसका पंजाबी नाम रतन ज्योति, गुजराती में बारहमासी और सदा सुहागण से जानते हैं। इसका अंग्रेजी नाम लो चनेरा रोजिय है।
सदाबहार को घर के आंगन से लेकर मंदिर परिसरों में खेल के मैदानों में स्कूलों के मैदानों में और गमलों में विशेष से लगाया जाता है। यह 1 फीट से लेकर 4 फीट तक ऊंचा होता है और इस पौधे की विशेषता यह है कि इसके टहनी को कहीं भी लगाए तो यह आसानी से लग जाता है। सदाबहार की कुल 8 प्रजातियां पाई जाती है इनमें से सिर्फ दो ही प्रजाति भारत में पाई जाती है और ज्यादातर प्रजाति अमेरिका में पाई जाती है।
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यह पौधा अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध तो है ही इसके साथ ही यह कई रोगों को दूर करने में भी बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ है। इसका स्वाद आम तौर पर कड़वा होता है लेकिन यह बड़ी से बड़ी बीमारियों को भी दूर कर देता है। इसके पत्तों का आकार गोल और अंडाकार होता है। मुख्यतः भारत में दो प्रजाति पाई जाती है एक सफेद पुष्प वाली और दूसरी गुलाबी पुष्प वाली। इसके मूल की छाल में कई प्रकार के अल्कलॉइड पाए जाते हैं।

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यद्यपि स्वाद में इसका पुष्प कुछ कड़वा अवश्य होता है, परंतु इस के औषधीय गुण के कारण यह पौधा हमारे लिए काफी उपयोगी सिद्ध हो सकता है। डायबिटीज, और कैंसर जैसी बीमारियों को खत्म करने की क्षमता इस में पाई जाती है।

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