अक्षत ने कहा —" ठीक है सुनाओ'
रोटी ने कहा मेरे जन्म की कहानी गेहूं से शुरू होती है।
किसान दादा ने मुझे उगाया मैं बड़ा होता गया अपने परिवार वालों के साथ रहता था। पर एक दिन क्या हुआ, किसान दादा नें मुझे मेरे परिवार वालों से अलग कर दिया और एक अंधेरी कोठरी में डाल दिया। पर सच कहूं मैं बहुत डर गया था फिर एक दिन मैंने खुद को एक ठेले पर पाया और मैं सोचने लगा कि कोई मुझे लेने कब आएगा और इस उदासीन जगह से ले जाएगा। तभी तुम्हारी मां आई और मुझे खरीदा और घर पर ले आई और लंबे चौड़े डिब्बे में डाल दिया। एक दिन तुम्हारी मां ने मुझे उठाया और खूब ठंडे पानी से नहला दिया। कितना ठंडा पानी था पर तुम्हारी मां बहुत अच्छी है। उन्होंने मुझे झट से उठाया और अच्छी गरम धूप में मुझे सुखाया और ठंडी में तो कितना अच्छा लगता है। धूप में सोना? है ना! फिर एक दिन माँ मुझे एक जगह लेकर गई, मुझे लगा था कि वह मुझे घुमाने लाई है पर यहां तो उल्टा ही हो गया। उसके बाद मैं चक्की में इतना घूमा कि मुझे तो चक्कर आने लगे। पर अरे यह क्या हुआ मैं तो एकदम गोरा हो गया ऐसा लग रहा था जैसे खूब सारा पाउडर लगा कर आया हूं। फिर मांँ मुझे अपने घर लाई और उन्होंने मुझे ठंडे पानी के साथ मिलाया। उसके बाद मुझे बेलन से इतना चपटा किया कि मुझे ऐसा लगा कि मैंने दुबले होने की दवा ले ली हो फिर तुम्हारी मां ने मुझे एक गर्म तवे पर डाला, अरे बाप रे ! मेरे पैरों में तो चटके ही लगे जा रहे थे। फिर उन्होंने मुझे आग पर डाला मैं तो जलने लगा फिर तुम्हारी मां ने मेरे ऊपर बहुत सारा घी डाला। आ........... हा............ हा........... । घी की खुशबू से तो मेरा दिल खुश हो गया, फिर मैं तुम्हारी थाली में आई। मुझे खुशी है मैं अपने परिवार के लिए तो नहीं किसी इंसान के पेट भरने के काम तो आई।