मेरे पड़ोस में रहने वाला गुड्डू,देखने में बहुत ही हैंडसम था,और उसे उसकी खूबसूरती पर घमंड भी था, हो भी क्यों नहीं,क्योंकि उसके पापा बहुत बड़े व्यवसायी थे,जिसकी वजह से उसे घूमने और ऐश करने के अलावा कोई काम नहीं था,सिर्फ नाम के लिए कॉलेज जाता था,क्योंकि उसे पढ़ने में मन लगता नहीं था,दिमाग में शायद ये बात थी की उसे बिजनेस ही करना है, लेकिन कुछ सालो के बाद उसके पापा को ये लग गया की गुड्डू पढ़ने के नाम पर सिर्फ उससे पैसा ले रहा है, इसलिए उसके पापा ने सख्ती दिखाई और उसे जॉब करने की सलाह दी,लेकिन गुड्डू जॉब के बदले व्यवसाय करना चाहता था,इसलिए उसने अपने पापा से व्यवसाय के नाम पर पैसा माँगा और उसके पापा ने दे दिया,
अब गुड्डू सोचने लगा की इन पैसो का क्या करू? फिर गुड्डू के दोस्त गौरव ने उसे अपना एक कंसल्टेंसी खोलने की सलाह दी,जिसमे बेरोजगार बच्चो को जॉब दिलाया जाये,गुड्डू को भी ये काम पसंद आ गया क्योंकि उसके पापा की वजह से उसकी जान-पहचान तो बाजार में हो ही गयी थी। फिर गुड्डू और उसके दोस्त गौरव ने मिल कर कंसल्टेंसी खोल दिया । वो कहते हैं ना जब पैसा हो तो इंसान का दिमाग काम करना बंद कर देता है,इसलिए तो गुड्डू ने अपना सारा पैसा कंसल्टेंसी खोलने में लगा दिया,
अब दोनों ऑफिस में बैठ कर बेरोजगार को ढूंढने में लग गए,लेकिन भला कोई उनके पास क्यों आता,ना ही गुड्डू बाजार जाता था ना ही उसका दोस्त, कुछ दिनों तक जब कोई नहीं आया तो गौरव ने गुड्डू को स्टाफ रखने की सलाह दी, और गुड्डू उसकी बात मान कर एक लड़की,जिसका नाम जेबा था, उसको रख लिया,जेबा देखने में ही सिर्फ सुन्दर थी,काम के मामले में तो बिलकुल बेकार थी, जब जेबा को पता चला की गुड्डू ही असली मालिक है तो वो गुड्डू के करीब होने लगी,भला ये बात गौरव को कैसे बर्दास्त होती,इसलिए उसने भी एक लड़की को काम पर रख लिया जिसका नाम फिजा था ।
अब दो दो स्टाफ हो गए,पहले से ही ऑफिस का खर्चा था,ऊपर से दो दो स्टाफ,खर्चा और बढ़ गया, लेकिन गुड्डू को कोई समस्या नहीं थी क्योंकि उसके दिमाग में ये था की अभी भी काफी पैसे हैं और तब तक कंसल्टेंसी जरूर चल जायेगा। लेकिन भला बिना कोई काम किये कैंडिडेट ऑफिस कैसे आता,इसलिए गौरव ने जेबा को फोन करके कैंडिडेट बुलाने को कहा,जेबा अपना काम करने लगी लेकिन उसे इस बात का गुस्सा आ रहा था की फिजा कोई काम नहीं करती,और ये बात उसने गुड्डू को बता दी,
अब गुड्डू ने फिजा को भी काम करने को बोला, ये बात फिजा ने जब गौरव को बताई तो गौरव और गुड्डू में अनबन होने लगी। इस अनबन का फैयदा दोनों लड़की को मिल रहा था,क्योंकि दोनों लड़की को बिना काम किये सैलरी जो मिल रहा था, बात उस समय और बिगड़ गयी जब फिजा और गौरव काफी करीब हो गए,उधर जेबा और गुड्डू काफी करीब हो गए। दोनों के बिच शारीरक संबंध भी बन गए। व्यवसाय के नाम पर ऑफिस में सिर्फ मोहब्बत की बातें होने लगी,एक केबिन में फिजा और गौरव तो दूसरे केबिन में जेबा और गुड्डू।
हाँ ये जरूर था की भूले भटके कोई अगर ऑफिस आ जाता था तो चारो मिल कर उसे लूट लेते थे,जॉब का दिलासा देते हुए सिर्फ पैसे लिए जाते थे,बेरोजगार लड़का या लड़की जॉब के नाम पर पैसा दे ही देता था,लेकिन बेचारो को जॉब नहीं मिलती थी,सिर्फ और सिर्फ सांत्वना मिलती थी,लेकिन भला ये कब तक चलता, ऐसे करते हुए कुछ महीने बीत गए,इधर गुड्डू का पैसा भी पूरा का पूरा खर्च हो चूका था, और उसकी प्रेमिका कह ले या स्टाफ कह ले हमेशा पैसा की मांग करते रहती थी,गुड्डू परेशान होने लगा,जेब में पैसा नहीं,पापा से मांग नहीं सकता था,ऊपर से ऑफिस का खर्चा,अपना खर्चा और जेबा की फरमाइशें, कल तक जो गुड्डू जेबा से प्यार करता था,वो आज उसकी फरमाइशें सुन सुन कर परेशान होने लगा,
कुछ महीने के बाद तो गुड्डू सैलेरी भी नहीं दे पा रहा था,ये बात गौरव को पता चल चुकी थी की गुड्डू के पास पैसा नहीं है,इसलिए उसने अपनी प्रेमिका फिजा को ऑफिस से निकाल कर दूसरी जगह जॉब में लगवा दिया, ताकि गुड्डू और जेबा की नजर में अच्छा बना रहे की उनकी वजह से ही उसने फिजा को निकाल दिया है,लेकिन यहाँ तो मामला ही कुछ अलग था,जब जेबा ने अपनी सैलरी की मांग तेज कर दी तो गौरव भी तबियत खराब होने का बहाना बना कर ऑफिस से निकल गया,
अब तो सारा का सारा खर्चा,जैसे ऑफिस का रेंट कैंडिडेट से लिया हुआ पैसा,और जेबा की सेलरी सब गुड्डू के माथा पर आ गया अब गुड्डू क्या करे ये उसकी समझ में नहीं आ रहा था, अब गुड्डू का मोहब्बत का भूत उसके सर से उतर चूका था,उसकी समझ में आ चूका था की सभी उसके पैसो से मोहब्बत कर रहा था,ना की गुड्डू से, हार कर उसने अपने पापा से पैसा माँगा और कंसल्टेंसी बंद करके अपने पापा के व्यवसाय में जुट गया,उसकी आँखे खुल चुकी थी,उसे मोहब्बत का सच्चा चेहरा जो देखने को मिल चूका था,और उसने जीवन में एक और सीख मिल गयी की थी की व्यवसाय में कभी अपने स्टाफ से मोहब्बत नहीं करनी चाहिए ना ही अपने दोस्त पर आँख मूँद कर भरोसा करना चाहिए ।
Pla