ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में स्थपित ईशा मशिह की एक प्रतिमा है जो दुनिया के सात अजूबों में से एक है । यह प्रतिमा ३९.६ मीटर (१३० फिट ) लंबी और ३० मीटर (९८ फिट ) चौड़ाई है । यह प्रतिमा का वजन ६३५ टन है । यह मूर्ति दुनिया की मूर्तियों में से एक है । इसका निर्माण १९२२ और १९३१ के बीच किया गया था । यह मूर्ति ब्राजील के इसाई धर्म के एक प्रतिमा के रूप में जाना जाता है । क्राइस्ट द रिडीमर दुनिया में सबसे बड़ा अर्ट डेको मूर्ति है । इस प्रतिमा को विशेष प्रकार के पत्थर से बनाया गया है , जिसे स्वीडन से तैयार किया गया था । प्रतिमा में यीशु का हात फैलाकर दिखाने के पीछे एक कारण यह था कि , यीशु सबको प्यार करता है , इस मूर्ति की लागत २५०००० डॉलर थी । एक लंबे इंतजार के बाद जुलाई २००७ में क्राइस्ट द रिडीमर को दुनिया का सात अजूबों में से एक का रूप में शामिल किया गया ।
विश्व के सात अजूबों में शुमार चीन की दीवर वास्तव में अपने आप में एक अजूबा है । इस दीवार को पूरा करने में कई सादिया लग गई थी । चीन का ये दीवार ७ वी सतब्दी यानी २८०० साल पहले बनाना शुरू हुआ था । और इसे पूरा होने में करीब दो हजार साल लग गए थे। इस फेमस दीवार का निर्माण राजा किन शिहुआंग ने करवाया था । एक समय इस दीवार को कई नामों से जाना जाता था , इसमें रमपत पर्पल फ्रंटियर , अर्थ ड्रैगन शामिल थे । हालाकि १९ वी शताब्दी में इसका ऑफिशियल नाम ग्रेट वाला ऑफ चाइना पड़ा । इस दीवार के कुछ हिस्से आपस में जुड़े हुए नहीं है । अगर इसके सारे हिस्से को जोड़ दिया जाए , तो इसकी कुल लंबाई ८८४८ किलोमीटर हो जाएगी । एक अनुमान के मुतबिक़ इस दीवार को बनाने में करीब २० से ३० लाख लोगों ने अपना पूरा जीवन लगा दिया था। दीवार इतनी चौड़ी है , कि उस पर एक सात ५ घोड़े या १० लोग एक साथ चल सकते है । वैसे तो इसे दुश्मनों से बचाव के लिए बनाया गया था । लेकिन सदियों तक इसका इस्तेमाल ट्रेड के लिए किया जाता है । इस दीवार को तोड़कर कई लोगो ने हमला भी किया था जैसे १२११ ईसा ने चंगेज खान ने । दुश्मनों पर नजर रखने के लिए इस पर कई किनारे भी बनाई गई थी ।
जोर्डन का पेत्रा एक ऐतिहासिक जगह है , जो अपने विचित्र वस्तु काला के लिए विश्व के सात अजूबों में शामिल है । यह शहर पत्थरों के विचित्र वास्तुकला और पानी की वाहन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है। पेट्रा एक "होर " नमक पहाड़ की ढलान पर स्तिथ है ,और पहाड़ों से घिरी हुई एक द्रोणी में स्तिथ है ।पेत्रा जॉर्डन के लिए बहुत ही महत्व रखता है । क्योंकि वह जॉर्डन का कमाई का जरिया है । पेत्रा एक यूनेस्को द्वारा एक विश्व धरोहर होने का दर्जा मिला है । इस शहर का निर्माण १२०० ईशा पूर्व में शुरू हुआ था । संभवत: ३१२ ईशा पूर्व में नबातियो ने अपने राजधानी तौर पर स्थापित किया था । इसमें १३८ फुट ऊंचा मंदिर , नहरे पानी के तालाब तथा खुला स्टेडियम है । यह पहाड़ मृत सागर से आकाबा की खाड़ी तक चलने वाली " वादी अरबा " नामक छाती की पूर्वी सीमा है।
ताजमहल भारत के आगरा शहर में स्तिथ एक विश्व धरोहर है । इसका निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया था । सन् १९८३ में ताजमहल युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना । अतीउत्तम मानवी कलाकृति में से एक बनाया गया है । ताजमहल को भारत की इस्लामिक कला का रत्न भी घोषित किया गया है । इसका निर्माण १६४८ को पूर्ण हुआ था । ताजमहल की उचाई ७३ मीटर है । हर साल ताजमहल को ९ से १० लाख लोग देखने आते है । ईसवी सन् १६३० में शुरू हुआ ताजमहल के बनाने के कार्य २२ साल तक चला इसे बनाने में करीब २० हजार मजदूरों ने योगदान दिया ।
रोम का कोलोसियम का निर्माण वेशपशियाम के शासनकाल के दौरान ७० और ७२ सी. ईसा. के बीच शुरू हुआ था । यह निरा के गोल्डन हाउस के आधार पर पैततिन्न हिल के पूर्व में स्तिथ है । ८२ सी. ईसा. में डमेटियान के नेतृत्व में सबसे ऊपर की इमारत को बनाने का कार्य पूरा किया गया था । रोम का कोलोसियम में ७५००० तक दर्शक बैठने की व्यवस्था थी । यह एक बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। यहां गुड फ्राइडे को पॉप एक विशाल जुलूस यहां से निकलते है । इसलिए रोमन चर्च से निकट संबंध है ।
दक्षिण अमेरिका में इडिज पर्वतों के बीच बसा मचू पिच्चू शहर पुरानी इनका सभ्यता का सबसे बढ़िया उदाहरण है । एसा माना जाता है कि करीब १४३० ई . के आसपास " इंकाओ " ने आधिकारिक कार्यों के लिए मचू पिच्चू का निर्माण किया था । हरीम बिंघम ने वर्ष १९११ में मचू पिच्चू की खोजकर इसे एक पर्यटन स्थान बनाने में सहयोग दिया था । १९८१ में मचू पिच्चू को पेरू का ऐतिहसिक धार्मिक स्थल घोषित कर पहचान दिलवाई गई और १९८३ में युनानिको के इस स्थान को वाल्ड हेरिटेज यानी विश्व धरोहर का दर्जा दे दिया । ये समुन्द्र तल से २४३० मीटर की ऊंचाई पर उरंबंबा घाटी , जिसमें से उरूबंबा नदी बाहेती है ।
चीचेन इट्ज़ा मेक्सिको में स्तिथ है । इस शहर को मापा सभ्यता के सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक माना जाता है । चीचेन इट्ज़ा आधुनिक विश्व के आश्चर्यो में से एक है ।
मेक्सिको के चीचेन इट्ज़ा में कुलकुलकान पिरामिड माया सभ्यता का अवशेष माना जाता है । यह पिरामिड ८० फिट से भी ऊंची है । चीचेन इट्ज़ा में सीढ़ियां ४५ डिग्री के एंगल पर ऊपर की ओर जाती है और पिरामिड के ऊपरी छोर तक जाती है । इस पिरामिड के चार दिशाओं में ९१ सीढ़ियां है ।
और प्रत्येक सीढ़ी साल के एक दिन के प्रतीक है । और ३६५ वा दिन ऊपर बने चबूतरों को माना जाता है ।