Kabir Shabad

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बनमाली जानै बन की आदि,
राम नाम बिना जनम बादि॥टेक॥
फूल जू फुले रूति बसंत,
जामैं मोहिं रहे सब जीव जंत।
फूलनि मैं जैसे रहै बास,
यूँ घटि घटि गोबिंद है निवास॥
कहै कबीर मनि भया अनंद,
जगजीवन मिलियौ परमानंद॥


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Kabir Shabad | Ecency