छात्र, प्रोफ़ेसर और सोने की अंगूठी

iamindian(41)
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सोने व गोबर के उदाहरण के ज़रिये जीवन की महत्वपूर्ण सीख देने वाले शिक्षक की कथा।
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प्रोफेसर सुनील अच्छे शिक्षक माने जाते थे। दूर-दूर से लोग अपने बच्चो को उनकी कोचिंग में पड़ने के लिए लेकर आते थे। एक बार प्रोफेसर ने एक सफाई कर्मी के बेटे छोटू को कोचिंग में सीट दे दी। उन्होंने देखा की पूरी क्लास एक तरफ बैठी है, और छोटू अकेला दूसरी तरफ। उन्हें यह देखकर बहुत बुरा लगा।

उन्होंने तय कर किया कि आज बच्चो को सबक सिखाना है। उन्होंने छात्रों के सामने पांच बाल्टियां रखते हुए कहा, इन पांचों बाल्टियों में अलग-अलग पदार्थ भरे हुए है। इनमे से किसी एक बाल्टी में मैनें सोने की अंगूठी डाल रखी है। जो कोई उस अंगूठी को निकलेगा, वह अंगूठी उसकी हो जायेगी। आपके पास सिर्फ दो मिनट का समय है। सभी छात्र बाल्टियों पर टूट पड़े।

प्रोफ़ेसर ने देखा, सभी बच्चे सिर्फ चार बाल्टियों पर टूट पड़े थे। जबकि एक बाल्टी बिलकुल अलग खाली पड़ी हुई थी। छोटू ने भी यह बात गौर की। छोटू उस बाल्टी के पास गया, उसने उसमे हाथ डाला और अंगूठी निकाल ली। सभी छात्र हैरत में पड़ गए। लेकिन छोटू ने वह अंगूठी अपने पास नहीं रखी। उसने वह अंगूठी प्रोफ़ेसर को लौटा दी। प्रोफ़ेसर कहने लगे, मेने देखा, आप सब केवल चार बाल्टियों में ही अंगूठी ढूढ रहे थे। ऐसा क्यों? एक बच्चे ने कहा, सर एक बाल्टी में खीर थी, एक में आटा, एक में चीनी, एक में चावल। पांचवी बाल्टी में गोबर भरा था।

प्रोफ़ेसर बोले, यह गलती आपकी नहीं है। हम सभी सफलता के आसान विकल्प ढूढ़ते है। हम मेहनत से जी चुराते है या जैसा की आपने अभी अनुभव किया, अपने मन की सीमाओं को लांघने से डरते हैं। और बस वही चूक जाते है। आपने यह भी देखा की छोटू ने अंगूठी मुझे वापस कर दी। इसलिए नहीं की वह बहुत अमीर है, बल्कि इसलिए की यह अंगूठी वह एक दिन खुद कमाना चाहता है। वह अपनी कदर जानता है।

सफलता के लिए कोई आसान विकल्प नहीं होता

iamindian@iamindian

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