राम राम सभी मित्रों को, आज से दो दिन बाद पूर्णिमा आ रही है ,जो कार्तिक माह शुरू होने से ठीक पहले आती है जिसको भारतीय आर्य समुदाय के लोग शरद पूर्णिमा के नाम से उस दिन को मनाते है,शरद पूर्णिमा एक वैज्ञानिक पर्व है जिसे पौराणिक ओर रूढ़िवादी भी दंतकथाओं के आधार पर मानते है ,शरद पूर्णिमा से भारतीय जलवायु में काफी परिवर्तन आने शुरू हो जाते है,जैसे मौसम में सर्दी का अहसास होने लगना,धीरे धीरे सर्दी की ओर मौसम बढ़ता जाता है ,इस दिन देखन वाली सबसे महत्वपूर्ण बात ये होती है कि रात को चंद्रमा अपने पूरे शबाब में होता है ओर इस रात चांद की रोशनी पूरे बारह मास की पूर्णिमाओं में सबसे ज्यादा होती है रात को ऐसा।नजारा होता है के जैसे किसी ने ट्यूबलाइट लगाई हो।पौराणिक श्रद्धा वालो का ये मानना होता है कि इस रोशनी में अगर खीर पकाकर रात भर इसकी रोशनी में अगर रखे तो ओर सुबह को उसे खाने पर उससे हमारे स्वास्थ्य को अनगिनत लाभ होते है,
शरद पूर्णिमा की रात वाकई बेहद शानदार होती है ,ये सफेद दूध सी रोशनी ओर वो शीतलता उसे केवल महसूस किया जा सकता है ,वर्णन नही