चाहे जितने संकट आए,
हमें नहीं अब डरना है ।
मानवता के हेतु हमें,
अब आगे ही बढ़ते रहना है।
सेवा का वृत लेकर हम,
आगे बढ़ने वाले हैं ।
नहीं रुके हैं, नहीं रुकेंगे,
हम कभी न झुकने वाले हैं ।
चाहे जितना दुर्गम पथ हो,
ना कोई अवलंबन हो।
हमें सदा सत्य पथ पर चलना,
संघर्षों से लड़ना हो।
तन अर्पित है, मन अर्पित है,
जीवन अर्पित करना है।
नए बिहग हैं, नए गगन में,
हमें उड़ाने भरना है।
चन्द्र और मंगल ग्रह पर भी,
जा करके अब बसना है।
मानवता के कल्याण हेतु,
हमें आगे बढ़ते रहना है।
नई ज्योति है, नया सवेरा,
नयी किरण फिर आयी है।
मानवता ने एक बार फिर,
ले ली यूँ अंगड़ाई है।
जीवन उनका धन्य हो गया,
धन्य हो गई वो गलियाँ।
जहाँ बचपन किलकारी भरता,
जहाँ हो रही रंगरेलियाँ।
नव जीवन है जीवन पथ पर,
आगे बढ़ते रहना है।
हम विकास पथ के राही हैं,
कभी नहीं अब रुकना है।