सुप्रभात

dskhoja(27)
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जो मिला उसमें हीं ख़ुश रहता हु ,
मेरी उँगलिया मुझे सिखाती है ,
दुनिया में बराबर कोई नहीं है ।।।

भूलकर भी कभी मुसीबत में ना पड़ना साहेब ,
खामखां अपने और पराए की पहचान हो जाएगी ।।

चेहरा देख कर इंसान पहचान की कला थी मुझमें,
तकलीफ़ तो तब हुयी जब इंसानो के पास चेहरे बहुत थे ।।।

🍁🍁🍁 सुप्रभात 🍁🍁🍁

सुप्रभात | Ecency